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अभी तक कुछ भी ऐसा नहीं मिला है, जिससे किसी लापता के बारे में जानकारी मिल सके। वहीं, मलबे में पड़े सीमेंट के टूटे स्लैब और उस पर बाहरी निकली सरिया, टिन की चादरें और अन्य वस्तुओं से रेस्क्यू में जुटे जवानों के घायल होने का खतरा भी बना हुआ है।
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग पर गौरीकुंड डाटपुल के पास तीन जुलाई की रात्रि लगभग 11.30 बजे बारिश के बीच हुए भारी भूस्खलन से तीन दुकानें बह गईं थी। इस हादसे में 23 लोग लापता हुए थे, जिसमें से तीन शव बरामद हो चुके हैं। बाकी 20 लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।
चार दिन से घटनास्थल से लेकर आसपास के क्षेत्र मेें रेस्क्यू किया जा रहा है। दुकानों का मलबा खाई से लेकर मंदाकिनी नदी के किनारे तक फैला हुआ है। इस मलबे में सिमेंट के टूटे स्लैब है, जिन पर सरिया बाहर निकली हैं। लोहे के टूटे एंगल, टिन की चादर भी हैं, जो रेस्क्यू में बाधा डाल रही हैं। साथ ही इस मलबे से जवानों के लिए खतरा बना हुआ है।
इन हालातों में प्रभावित क्षेत्र में मंदाकिनी नदी में गोता लगाकर खोजबीन नहीं हो पा रही है। डीडीएमओ नंदन सिंह रजवार ने बताया कि चार दिन से मलबे की एक-एक चीज को खंगाला जा चुका है। लेकिन अभी तक लापता लोगों के बारे में कोई भी सुराग नहीं मिल पाया है।
सोमवार को गौरीकुंड में बार-बार होती बारिश के कारण सुबह से दिनभर में कई बार रेस्क्यू बाधित होता रहा। डीडीएमओ रजवार ने बताया कि केदारनाथ में बारिश होते ही मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ बहाव भी तेज हो रहा है, जिस कारण खोजबीन अभियान प्रभावित हो रहा है।
घटनास्थल से लेकर सोनप्रयाग होते हुए कुंड डैम, रुद्रप्रयाग, धारी देवी तक रेस्क्यू किया जा रहा है। दूसरी तरफ पौड़ी व टिहरी जनपद पुलिस द्वारा भी श्रीनगर से लेकर देवप्रयाग तक कई जगहों पर अलकनंदा नदी में लापता लोगों की खोजबीन के लिए विशेष अभियान चलाया गया।
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