चमोली हादसा: शवों के ऊपर से ही लगाई कूद, आंख खुली तो अस्पताल में था, घायल ने बताई रूह कंपाने वाले दिन की कहानी

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चमोली जिले में नमामि गंगे परियोजना के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में अचानक करंट दौड़ा। ऐसा लगा कि मानों मौत अपनी ओर खींच रही हो। मेरे होंठ, पीठ और हाथों पर छाले पड़ने लगे थे। जो जहां था वहीं गिर रहा था। एक के बाद एक शव रास्ते पर पड़े देखे तो मुझे कुछ नहीं सूझा।

मैंने शवों के ऊपर से ही बिना रेलिंग को छुए नीचे झाड़ियों में कूद लगा दी। जब होश आया तो मैं जिला अस्पताल में था। यह आपबीती करंट हादसे के गंभीर घायल महिंद्रा शोरूम के मैनेजर अपर चमोली निवासी धीरेंद्र रावत ने बताई। करंट हादसे के घायलों को ऋषिकेश एम्स में उपचार के बाद घर भेज दिया गया है।

मगर हादसे के घायल आज भी उस दिन को याद कर कांप उठते हैं। एम्स में उपचार के दो दिन बाद धीरेंद्र रावत घर पहुंचे तो उन्होंने आपबीती सुनाई। बकौल धीरेंद्र, गणेश का शव प्लांट के प्लेटफार्म पर पड़ा था और परिजन उसके चारों ओर बैठकर बिलख रहे थे।



पुलिस अधिकारी, जल संस्थान के जेई समेत अन्य लोगों के साथ वह भी मौके पर ही खड़े थे कि अचानक तेज करंट परिसर में फैल गया।


मैं थोड़ी दूरी पर सीमेंट के पिलर के सहारे खड़ा था। प्लांट की रेलिंग ऊंची होने के कारण छलांग भी नहीं लगा सकता था। मुझे बार-बार करंट लग रहा था। जब एक के बाद एक शव रास्ते पर पड़े देखे तो मैंने शवों के ऊपर से ही बिना रेलिंग को छूए नीचे झाड़ियों में कूद लगा दी। जब होश आया तो मैं जिला अस्पताल में था। 


करंट हादसे के घायल अभी भी मानसिक तौर पर उभर नहीं पाए हैं। धीरेंद्र रावत ने बताया कि अभी भी यह खौफनाक हादसा आंखों में तैर रहा है।

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रातभर नींद नहीं आ रही है। वहीं चमोली के पवन राठौर का कहना है कि हर वक्त आंखों के सामने हादसे का मंजर घूम रहा है। नींद नहीं आ रही है। 


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