चैत अमावस्या पर पिंड दान का विशेष महत्व, गयाजी में आज 5000 से अधिक पिंडदानी पितरों को करेंगे पिंड अर्पण

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गया. चैत मास की अमावस्या तिथि इस बार 21 मार्च को है. अमावस्या तिथि पर पिंडदान का विशेष महत्व बतलाया गया है. इस महत्ता के कारण अमावस्या तिथि पर पिंडदान के लिए इस बार भी देश के विभिन्न राज्यों से पिंडदानियों के आने का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा. जानकारों की माने तो जम्मू, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, गुजरात सहित देश के कई अन्य राज्यों से अब तक पांच हजार से अधिक श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं.

श्रद्धालुओं को जल संकट की समस्या से जूझना पड़ सकता है

फल्गु नदी सुखी रहने व गयाजी डैम से पानी निकासी हो जाने से इस बार अमावस्या तिथि पर पिंडदान करने वाले श्रद्धालुओं को जल संकट की समस्या से जूझना पड़ सकता है. हालांकि विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति ने जिला प्रशासन को विष्णुपद मेला क्षेत्र स्थित वेदी स्थलों पर अमावस्या तिथि पर पिंडदान के निमित्त श्रद्धालुओं की जुटने वाली संभावित भीड़ पहुंचने को लेकर सुविधा के लिए पानी की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए गुहार लगाया है. फल्गु नदी, इसके पश्चिमी तट स्थित देवघाट व विष्णुपद वेदी क्षेत्रों में सबसे अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है.

चैत अमावस्या पर पिंड दान का विशेष महत्व

पंडा समाज के मणिलाल बारिक ने बताया कि चैत अमावस्या पर पिंड दान का विशेष महत्व होने से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब सहित देश के अधिकतर राज्यों के श्रद्धालु यहां आकर अपने पितरों को पिंडदान करते हैं. उन्होंने बताया कि आश्विन मास में पिंडदान करने वाले श्रद्धालुओं के पितरों जिस तरह मोक्ष की प्राप्ति होने की मान्यता रही है, यही फल चैत अमावस्या पर पिंडदान करने वाले श्रद्धालुओं के पितरों को मिलता है.

चैत माह में एक मास का खरमास होता है

समिति के कार्यकारी अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल व सदस्य महेश लाल गुपुत ने बताया कि चैत माह में एक मास का खरमास होता है. खरमास में पिंडदान का विशेष महत्व माना गया है. उन्होंने कहा कि इस मास में भी देश के विभिन्न राज्यों के श्रद्धालु यहां आकर अपने पितरों के आत्मा की शांति व मोक्ष प्राप्ति के निमित्त पिंडदान, श्राद्धकर्म व तर्पण का कर्मकांड अपने कुल पंडा के निर्देशन में पूरा करते हैं.

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