छठ महापर्व में कैसा रहेगा मौसम, आपके जिले में कब होगा सूर्यास्त, कब उगेंगे सूर्यदेव, यहां देखें टाइम

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Chhath Puja Suryast-Suryoday Time|छठ महापर्व दुनिया के एकमात्र पर्व है, जो प्रकृति को समर्पित है. इस पूजा में न पुजारी की जरूरत होती है, न ही कोई विशेष पूजा विधि इसके लिए बनी है. छठव्रती खुद पूजा करतीं हैं. नदी, तालाबों में स्नन करके जल लाती हैं और उससे भात, चने की दाल और कद्दू की सब्जी का प्रसाद बनता है. सबसे पहले छठव्रती प्रसाद ग्रहण करतीं हैं. इसके बाद लोगों में इसे वितरित कर दिया जाता है. छठ महापर्व की इससे ही शुरुआत होती है. इसे नहाय-खाय कहते हैं. नहाय-खाय के साथ चार दिन के छठ महापर्व का आरंभ होता है. इसके अगले दिन खरना, फिर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य और उसके अगले दिन सुबह में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व का समापन हो जाता है. छठ घाट पर ही छठव्रती हवन करते हैं और उसके बाद प्रसाद का वितरण करते हैं. घाट से लौटने के बाद घर में पूजन के बाद वह अपना 36 घंटे का निर्जला उपवास तोड़ते हैं. इसलिए छठ महापर्व के दौरान सूर्यास्त और सूर्योदय के समय का बड़ा महत्व होता है.

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