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जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड का मामला
– फोटो : अमर उजाला।
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जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड के दायरे में आने वाले 26 गांवों के किसानों ने मुआवजे की रकम को लेकर रविवार को इटहिया गांव के पास स्वामी दयानंद इंटर कॉलेज में पंचायत बुलाई थी। अभी किसान अपनी रणनीति तैयार कर रहे थे कि इसी बीच उन्हें सूचना मिली कि गांव के पास ही सड़क का सर्वे करने नायब तहसीलदार विकास कुमार, एनएचएआई और एसएलओ के कर्मचारी पहुंचे हैं। किसान उनके पास पहुंच गए और एक बार फिर सर्वे रोकवाकर हंगामा शुरू कर दिया। अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की पर नाकाम रहे। इसके बाद अधिकारी लौट गए। वहीं किसानों ने अब आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
दरअसल, कोनी, बालापार, जंगल सुभान अली, मौलाखोर, महमूदाबाद, कैथवलिया, करमहा, मौलाखोर, औराही, नाहरपुर, मदरहवा समेत 26 गांवों के किसान जमीन के साथ मकान का मुआवजा भी बाजार रेट पर देने की मांग पर अड़े हैं। अधिकारियों ने आर्बिट्रेशन (न्यायिक मध्यस्थता) में जाने की सलाह दी है। वहीं, डीएम ने भी किसानों को भरोसा दिया था कि वे आर्बिटेशन में जाएं। उन्हें अधिक से अधिक मुआवजा दिलाने की कोशिश होगी।
उधर, किसान अपनी बात पर अड़े हैं। रविवार को सुबह करीब 10 बजे किसानों ने बातचीत के लिए पंचायत बुलाई थी। इसी बीच जब उन्हें पता चला कि प्रशासन, एनएचएआई और एसएलओ के लोग सर्वे कर रहे हैं तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
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किसानों के विरोध को देखते हुए अधिकारियों ने काम रोकवा दिया। इसकी जानकारी नायब तहसीलदार ने डीएम को दी। डीएम के निर्देश पर तहसीलदार सदर विकास सिंह भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने भी किसानों को समझाने का प्रयास किया। तहसीलदार ने इस माह के अंत तक आर्बिट्रेशन दाखिल करने का समय दिया।
किसानों ने कहा कि जब तक मामले का निस्तारण नहीं हो जाता, किसी तरह का सर्वे, जमीन की सफाई आदि न कराएं। इस दौरान विकास पांडेय, सुमित साहनी, गुलाब चंद्र, वीरेंद्र , बशिष्ठ मुनि शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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