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जम्मू में एलजी मनोज सिन्हा और केरल के गर्वनर आरिफ खान
– फोटो : संवाद
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जम्मू के शिक्षक भवन गांधी नगर में डोगरा सदर सभा जम्मू कश्मीर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहमद खान बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे। उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। केरल के राज्यपाल आरिफ महमद खान ने कहा कि आज एकता के बिना शांति नहीं हो सकती।
शांति के लिए एकता का होना जरूरी है।उन्होंने लोगों को एकता के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का ताज है। पाकिस्तान के दो टुकड़े पहले थे। आज भी हैं। हमें भारत पर गर्व है। उन्होंने कई तरह के उदाहरण देकर धर्म की परिभाषा समझाई।
कहा कि उन्होंने डोगरा सदर की स्थापना का इतिहास पढ़ा, लेकिन 1904 में धर्मनिरपेक्ष शब्द के बारे में जानने वाले लोग किस विचारधारा के होंगे, जिन्होंने यूरोप में धर्मनिरपेक्ष शब्द के आने से पहले भारत में उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह लोग एकता की भावना रखते थे।
कुर्बानियां देने से संकोच नहीं करते थे। जो लोग बड़ी कुर्बानी देने से संकोच करते हैं। उन्हें राजनीति में आने या राजनीति करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ज्ञान का अधिक प्रचार प्रसार करना चाहिए। जितना ज्ञान बांटा जाएगा। उतना अधिक उसका प्रचार होगा।
जो व्यक्ति ज्ञान को छुपाता है। वह आगे नहीं बढ़ पाता है। उन्होंने एक दूसरे को ज्ञान देने के लिए कहा है। इसके अलावा उन्होंने अंत में कश्मीर के बारे में भी अपनी बात रखी। कहा कि कश्मीर भारत का ताज है। पाकिस्तान के दो टुकड़े पहले थे। आज भी हैं। हमें भारत पर गर्व है।
सभी धर्मों के शोधार्थियों ने लोगों को धर्म के वास्तविक अर्थ से अवगत करवाया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के लोगों में आपसी सौहार्द पैदा करना है। मौके पर डोगरा सदर सभा के अध्यक्ष गुलचैन सिंह चाढ़क, सभा के प्रभारी गंभीर देव सिंह चाढ़क सहित अन्य भी उपस्थित रहे।
बच्चों को नहीं मिल रहे संस्कार : विश्वमूर्ति
पद्मश्री प्रोफेसर विश्वमूर्ति शास्त्री ने कहा क़ि अनुशासन और सदविचार आदि से देश का कल्याण होता है। इसी को मानवता कहते हैं, लेकिन वर्तमान समय में अधिक अनुशासनहीनता हो रही है। इसका प्रमुख कारण बच्चों को संस्कार नहीं मिल पा रहे हैं। युवाओं को व्यवस्थित और चिंतनशील बनाने के लिए संस्कार देने की जरूरत है।
इस्लाम स्कॉलर शहजाद अहमद कासमी ने कहा कि भारत का इतिहास आपसी भाइचारे से संपूर्ण है, लेकिन एकजुटता दिखाना समय की मांग है। इसके अलावा रणजीत सिंह ने कहा कि धर्म की परिभाषा को समझें तो सभी धर्मों का एक ही सार है।
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