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जम्मू कश्मीर में महंगे दाम पर बिक रहा टमाटर
– फोटो : अमर उजाला
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सब्जी और सलाद में खाने का जायजा बढ़ाने वाला टमाटर आम लोगों की रसोई से लगभग गायब हो चुका है। भारी बारिश के चलते टमाटर की फसल बर्बाद होने से इसकी आवक घटने के साथ दाम बढ़ गए हैं। इसका असर रोजगार पर भी पड़ा है। 500 के करीब श्रमिकों का रोजगार छिन गया है।
व्यापारियों के अनुसार मौसम को देखते हुए अभी करीब 18 दिन तक महंगाई से लोगों को राहत मिलने के आसार नहीं हैं। शहर की सबसे बड़ी नरवाल मंडी में एक माह पहले प्रतिदिन 10 से 12 ट्रकों में भरकर साढ़े छह हजार से ज्यादा टमाटर के क्रेट आते थे।
इन्हें उतारने और फिर दूसरी जगहों पर भेजने के लिए श्रमिकों की जरूरत होती है। इस काम के लिए मंडी में ही कम से कम 700 श्रमिकों की जरूरत रहती है। अब मंडी में तीन से चार ट्रक ही टमाटर के आ रहे हैं। इस काम को 200 श्रमिक ही पूरा कर ले रहे हैं।
ऐसे में करीब 500 श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं। हालांकि मंडी के व्यापारियों का कहना है कि टमाटर की आवक कम होने से श्रमिकों को कम दुकानदारों को ज्यादा नुकसान हो रहा है। इन्हें अन्य सब्जियां तो लेनी ही पड़ रहीं है।
मंडी में 150 रुपये प्रतिकिलो बिका टमाटर
नरवाल मंडी के थोक सब्जी विक्रेता हरदीप गुप्ता का कहना है कि शुक्रवार को मंडी में ही टमाटर का थोक भाव 150 रुपये प्रति किलो रहा है। दुकानों में 180 से 200 रुपये के बीच बिक रहा है। अभी टमाटर के आवक में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
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