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कठुआ में छिड़काव करता नगर पालिका कर्मी।
– फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में डेंगू ने वर्ष 2022 में ऑलटाइम रिकॉर्ड बनाया है। इस साल सर्वाधिक 8264 मामले मिले। जिला जम्मू डेंगू मामले में सबसे अधिक प्रभावित हुआ। इस जिले में कुल मामलों में से (5536 मामले) 67 प्रतिशत मामले मिले हैं। 18 लोगों की मच्छरों ने जिंदगी लील ली। विशेषज्ञों के अनुसार आगामी वर्षों में भी खासतौर पर जम्मू संभाग के जिलों के लिए डेंगू चुनौती रहेगा।
उनके अनुसार शहरीकरण और निर्माण स्थल कार्यों में वृद्धि से मच्छरों के पनपने के लिए स्रोत बढ़ा है। आबादी बढ़ने से भी डेंगू फैलने में मदद मिलती है। यह कारण जलवायु परिवर्तन से भी जुड़े हैं। इसमें अधिक बरसात के कारण निर्माण स्थलों पर पानी जमा रहने से डेंगू के लिए जिम्मेदार लारवा पनपा है।
इस साल दिसंबर के मध्य के बाद पारे में गिरावट आने पर डेंगू से राहत मिली थी। पिछले सालों की तुलना में इस साल सर्वाधिक 32221 डेंगू के परीक्षण करवाए गए, जिसमें 25 प्रतिशत से आठ हजार से अधिक डेंगू के मामले मिले। जिला जम्मू में डेंगू पुराने शहर के जानीपुर, सुभाषनगर, रिहाड़ी आदि इलाकों में अधिक पनपा।
जिले में मिले कुल मामलों में उक्त इलाकों में 80 से 85 प्रतिशत तक मामले रहे। इस साल दिसंबर के आखिर तक भी डेंगू के मामले मिलते रहे हैं, इसे भी जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इस साल रिकॉर्ड डेंगू के मामले मिलने से स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के इसकी रोकथाम को लेकर पूर्व में किए दावों की पोल भी खोली है।
सरकारी व निजी चिकित्सा केंद्रों पर हजारों डेंगू के मरीज पहुंचे। अनाधिकारिक तौर पर 10 हजार से अधिक डेंगू के मामले मिले हैं। प्रदेश में डेंगू से दूसरे नंबर पर जिला उधमपुर सबसे अधिक प्रभावित हुआ। यहां 850 डेंगू के मामले मिले। इसी तरह सांबा में 364, डोडा में 243, कठुआ में 173, राजोरी में 105, रियासी में 119, रामबन में 51, किश्तवाड़ में 27, कश्मीर में 14, पुंछ में 41 डेंगू के मामले मिले।
इस साल बच्चे भी डेंगू से अधिक प्रभावित हुए। एपिडॉमिनिलॉजिस्ट डॉ. हरजीत राय का कहना है कि जम्मू संभाग के खासतौर पर जिला जम्मू में डेंगू के लिए जिम्मेदार लारवा के पनपने का स्रोत बढ़ा है। इसका कारण यह भी देखा गया है कि जहां तहां निर्माण कार्य हो रहे हैं, जिससे पानी अधिक जमा रहा और मच्छर बढ़े।
जलवायु परिवर्तन में इस साल बरसात भी अच्छी हुई है, जिससे कई जगह पानी अधिक देर तक जमा रहा। इसके अलावा आबादी बढ़ना भी एक कारण रहता है। इससे डेंगू को फैलने में मदद मिलती है। शहरी इलाकों का लगातार विस्तार हो रहा है।
किस साल कितने मामले मिले
वर्ष 2021 में प्रदेश में 1709 डेंगू के मामले मिले थे और चार लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 2020 में 53, वर्ष 2019 में 439, वर्ष 2018 में 214, वर्ष 2017 में 488, वर्ष 2016 में 79, वर्ष 2015 में 153, वर्ष 2014 में 1, वर्ष 2013 में 1838 (चार की मौत), वर्ष 2012 में 17 (एक की मौत) मामले मिले हैं।
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