जम्मू कश्मीर: स्कूलों में केवल जेके बोर्ड की पुस्तकें लगाने के फैसले का विरोध, निर्णय पर पुनर्विचार की मांग

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Jammu Kashmir: oppose against the decision to put only JK Board books in schools

सांकेतिक तस्वीर

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जम्मू-कश्मीर एजुकेशनल वेलफेयर एलायंस ने स्कूलों में केवल जेके बोर्ड द्वारा अनिवार्य की गई पुस्तकों का उपयोग करने के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने उप राज्यपाल मनोज सिन्हा से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। एलायंस के सदस्य डॉ. तौसीफ अहमद ने कहा, इस फैसले ने हितधारकों के बीच चिंताएं पैदा कर दी हैं। यह अनजाने में छात्रों और अभिभावकों के लिए उपलब्ध विकल्पों को प्रतिबंधित करता है। 

डॉ. अहमद ने कहा कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) छात्रों के समग्र विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए कौशल-आधारित शिक्षा और गेम-आधारित डिजिटल और संचार प्रारूपों का लाभ उठाने के महत्व को रेखांकित करती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या जेके बोर्ड द्वारा निजी स्कूलों पर थोपी गई किताबें एनईपी के अनुरूप हैं। क्या ये किताबें एनईपी के तहत तैयार किए गए पाठ्यक्रम को पूरा करती हैं।

‘पुस्तक प्रकाशन से जुड़े लोगो की आजीविका संकट में’

डॉ. अहमद ने कहा कि यह फैसला 10,000 से अधिक परिवारों के भविष्य को भी खतरे में डालता है, जो पुस्तक प्रकाशन से अपनी आजीविका कमा रहे हैं। एलायंस के सदस्यों ने हाल ही में 125 निजी स्कूलों के छात्रों को सरकारी स्कूलों के साथ टैग करने का मुद्दा भी उठाया। 

यूटी प्रशासन ने हाल ही में निजी स्कूलों के छात्रों के लिए परीक्षा फॉर्म लेने से इनकार कर दिया, जो उचित पट्टा दस्तावेज के बिना राज्य की भूमि पर चल रहे थे। इन छात्रों को सरकारी स्कूलों के साथ टैग करके परीक्षाओं में बैठने की अनुमति दी गई है। 

प्रसिद्ध शिक्षाविद् सीएल विशेन ने कहा, राज्य की भूमि पर संचालित होने वाले आर्मी गुडविल स्कूलों के प्रति उदारता दिखाई गई है। इन स्कूलों के संबंध में भी यही दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, जहां 2,300 से अधिक लोग कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों पर सरकार का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्टार्टअप इंडिया’ मंत्र के खिलाफ है।

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