जम्मू कश्मीर: 18 से अधिक आयु वर्ग में एहतियाती टीका लगाने में बेपरवाह, 17% ने ही दिखाई हिम्मत

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कोविड वेरिएंट डेल्टा, ओमिक्रॅान के बाद अब फिर वायरस के नए स्वरूप के साथ लड़ने की तैयारी की जा रही है। कोविड की पिछली तीन लहरों को झेलने के बाद यह लड़ाई कोई नई नहीं है, लेकिन चिंता यह है कि कोविड टीके की दो खुराक लेने के बाद अधिकांश आबादी ने एहतियाती खुराक नहीं ली है। प्रदेश में 18 से अधिक आयु वर्ग में सिर्फ 17 प्रतिशत लोगों ने ही तीसरी एहतियाती (बूस्टर) खुराक ली है।

 

विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल कोविड से घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन अगर नया वेरिएंट अपना प्रभाव अधिक दिखाएगा तो इसकी चपेट में एहतियाती खुराक न लेने वाले जल्दी आएंगे। खासतौर पर पहले से बीमार लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी, जिससे सभी को प्राथमिकता पर एहतियाती खुराक ले लेनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार कोविड टीके की खुराक लेने से वायरस से लड़ने के लिए मानव शरीर में 6 से 8 माह तक खुराक का प्रभाव रहता है।

यह खुराक शारीरिक क्षमता को मजबूत करने का काम करती है, जिससे वायरस के हमले पर मानव शरीर पर कम प्रभाव रहता है। इस साल की बात करें तो मार्च तक कोविड लगभग शांत हो गया था, जिसके बाद मास्क भी उतर गए। सामाजिक दूरी के नियम का पालन बंद हो गया। बार-बार हाथ धोने की आदत भी छूट गई। इसमें अधिकांश लोग कोविड टीके की एहतियाती खुराक लेने से परहेज कर गए जो भविष्य की कोविड चुनौतियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के तहत जम्मू-कश्मीर में 18 से अधिक आयु वर्ग में अनुमानित आबादी 93,03,842 है जो कुल आबादी का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा है। इसमें पहली और दूसरी डोज सभी लोगों ने लगवाई, लेकिन तीसरे टीके की एहतियाती खुराक सिर्फ 17 प्रतिशत लोगों ने ही ली है। यानी 77,06,000 लोग एहतियाती खुराक से अछूते रहे। एहतियाती खुराक लेने वालों में 58217 स्वास्थ्य कर्मी, 233822 फ्रंट लाइन वर्कर, 60 से अधिक आयु वर्ग में 377348 और 18 से 59 आयु वर्ग में 928455 लोग हैं और यह कुल संख्या 1597842 है।

12 से 14 आयु वर्ग में भी 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल नहीं

कोविड की चुनौतियों के बीच 12 से 14 आयु वर्ग की अनुमानित आबादी 599700 पर अभी दोनों खुराक में सौ प्रतिशत के लक्ष्य को हासिल नहीं किया गया है। इसमें पहली खुराक में 553841 के साथ 92 प्रतिशत और दूसरी खुराक में 517810 के साथ 86 प्रतिशत बच्चों ने टीके की खुराक ली है। इसमें किश्तवाड़ और जम्मू जिला सबसे पिछड़े हैं। किश्तवाड़ की कुल अनुमानित आबादी 11278 पर पहली खुराक में 67 प्रतिशत और दूसरी खुराक में 61 प्रतिशत बच्चों ने खुराक ली है। इसी तरह जम्मू की अनुमानित आबादी 74795 पर पहली खुराक में 65 प्रतिशत और दूसरी खुराक में 47 प्रतिशत बच्चों ने टीके की खुराक ली है। हालांकि 15 से 17 आयु वर्ग की अनुमानित आबादी 833000 में पहली खुराक में 105 और दूसरी में 103 प्रतिशत लोगों ने टीके की खुराक ली है।

जनवरी-फरवरी में दिख सकता है कोविड का प्रभाव

जीएमसी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप डोगरा का कहना है कि कोविड को लेकर फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। इसके लिए विभागीय स्तर पर पर्याप्त तैयारियों को सुनिश्चित बनाया जा रहा है, लेकिन जिन लोगों ने एहतियाती खुराक नहीं ली है उन्हें जल्द लेनी चाहिए। कोविड के नए वेरिएंट का जनवरी या फरवरी में प्रभाव दिख सकता है। खुराक लेने के 15 से 20 दिन के बाद ही मानव शरीर में शारीरिक क्षमता बढ़ती है, इसलिए अगर अभी एहतियाती खुराक ले लेते हैं तो हम सभी कोविड से लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएंगे। वहीं, प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में स्वास्थ्य केंद्रों पर कोविड के एहतियाती टीके की खुराक उपलब्ध नहीं हो रही है। स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि केंद्र को एहतियाती खुराक भेजने के लिए कहा गया है।



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