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बाएं ठग राजीव तिवारी के साथ दरोगा और दाएं गांव में बना दो मंजिला मकान।
– फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
एम्स में ठेका दिलाने के नाम पर ठगी के आरोप में पकड़ा गया राजीव अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। दुनिया छोड़ चुके पिता का सपना बेटे को आईएएस बनाना था, ताकि परिवार का नाम रोशन हो सके। राजीव ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की तो उन्होंने इसी सपने के साथ उसे तैयारी करने दिल्ली भेज दिया था। लेकिन, यहां सफलता नहीं मिली तो वह गलत रास्ते पर चल निकला। ठग दंपती के जेल जाने के बाद भी गांव में चर्चाएं कम नहीं हुई हैं।
राजीव तिवारी मईल थाना क्षेत्र के अंडिला गांव निवासी दिवंगत अखिलेश्वर तिवारी का इकलौता बेटा है। वह किसी कंपनी में काम करते थे और उनके व्यवहार तथा लगाव से गांव में उनका बहुत ही सम्मान था। गांव वालों ने बताया कि वह अपने जीवन में बहुत ही संघर्ष कर आगे बढ़ेे और बेटे को आईएएस बनाने का उनकी तमन्ना थी। इसीलिए राजीव को तैयारी करने के लिए उन्होंने दिल्ली भेजा था। लेकिन राजीव उनके सपनों को पूरा नहीं कर सका।
इसके बाद ही वह गलत तरीकों से रुपये कमाने लगा। गोरखपुर में मकान बनवा लिया। वहीं पर परिवार के साथ रहता था। पांच साल पूर्व पिता के निधन के बाद राजीव का गांव पर आना-जाना शुरू हुआ। लेकिन, पुराना मकान खंडहर होने के कारण वह वहां रुकता नहीं था। एक साल पूर्व बरठा चौराहा से बरेजी जाने वाली सड़क पर गांव में ही राजीव ने दो मंजिला मकान बनवाया। गांव में लोग राजीव की आय का कोई स्रोत नहीं जानते थे। ऐसे में उन्हें उसके मकान बनवाने पर अचरज भी हुआ। इसी बीच राजीव त्योहारों पर गांव आने-जाने लगा।
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