जेएनयू छात्रसंघ चुनाव : छात्रों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

[ad_1]

एबीवीपी ने विवि को लिखा पत्र, पीएचडी दाखिले के बाद चुनाव का नोटिस वापस लेने की मांग

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में छात्रसंघ चुनावों के मुद्दे पर एबीवीपी और विश्वविद्यालय प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। जेएनयू एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर पीएचडी दाखिले के बाद चुनाव आयोजित करवाने के नोटिस को वापस लेने की मांग रखी है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि छात्रसंघ चुनाव के लिए जल्द घोषणा नहीं की गई तो आंदोलन उग्र होगा।

जेएनयू एबीवीपी के सदस्य व इकाई मंत्री विकास ने बताया कि एक महीने से विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रसंघ चुनाव आयोजित करवाने को लेकर घोषणा करने की मांग की जा रही है। हर बार एक नया बहाना लगा दिया जाता है। अब विश्वविद्यालय ने छात्रों के नाम नोटिस जारी किया है। इसमें पीएचडी परीक्षा और दाखिले के बाद छात्रसंघ चुनाव आयोजित करवाने का आश्वासन दिया है जबकि छात्रों को इस बात से झूठ बोला जा रहा है, क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव करवाना ही नहीं चाहता है। इसी मुद्दे पर शनिवार को हमने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखा है कि वे इस नोटिस को तुरंत वापस लें।

विश्वविद्यालय चुनाव आयोजित करवाना ही नहीं चाहता

जेएनयू एबीवीपी इकाई मंत्री विकास ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुक्रवार को छात्रों के नाम जो नोटिस जारी किया है, उसमें पीएचडी दाखिले के बाद छात्रसंघ चुनाव आयोजित करवाने की बात दोहराई गई है। जेएनयू प्रशासन सरासर चुनाव के नाम पर छात्रों को गुमराह कर रहा है। क्योंकि वह छात्रसंघ चुनाव आयोजित करवाना ही नहीं चाहता है। दरअसल, जेएनयू समेत चार अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2023-24 के तहत पीएचडी दाखिला प्रवेश परीक्षा की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को दी है। एनटीए ने तीन बार दाखिला प्रवेश आवेदन की डेट बढ़ाई है जबकि अभी 22 सितंबर तक आवेदन भरे जा सकते हैं। एनटीए ने पीएचडी दाखिला प्रवेश परीक्षा की तारीख की घोषणा नहीं की है। ऐसे में परीक्षा कब तक होगी, रिजल्ट आने के बाद वाइवा समेत इंटरव्यू, दाखिला की प्रक्रिया में दो से तीन महीने से अधिक का समय लग सकता है। यदि छात्रसंघ चुनाव आयोजित करवाने में दिसंबर या जनवरी तक देरी होती है तो फिर 2024 संसदीय चुनावों की घोषणा हो सकती है। ऐसे में छात्रसंघ चुनाव आयोजित नहीं हो सकेंगे।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *