टूट गई NCP: अजित पवार की बगावत का महाराष्ट्र में कितना पड़ेगा असर, शरद पवार आगे क्या करेंगे? जानें

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पहले जानिए एनसीपी में दरार पड़ने की पूरी कहानी
इसकी शुरुआत नवंबर 2019 से हुई। तब विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। भाजपा को 105 सीटों पर जीत मिली थी। शिवसेना के 56 और एनसीपी के 54 प्रत्याशी चुनाव जीते थे। कांग्रेस को 44 सीटों पर जीत मिली थी। 

भाजपा के साथ चुनाव लड़ने वाली शिवसेना ने मुख्यमंत्री के मुद्दे पर गठबंधन तोड़ लिया। भाजपा भले ही सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन बहुमत के आंकड़े से दूर थी। बहुमत के लिए पार्टी को 145 विधायकों का समर्थन चाहिए था। आनन-फानन में अजित पवार ने एनसीपी का समर्थन दे दिया और देवेंद्र फडणवीस सीएम बन गए। अजित पवार ने डिप्टी सीएम का पद की शपथ ली।

ये सबकुछ अजित ने खुद के बल पर किया। मतलब इसके लिए उन्होंने पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार की मंजूरी नहीं ली थी। कुल मिलाकर ये एक तरह से बगावत थी। इसका असर हुआ कि पांच दिन के अंदर ही एनसीपी ने अपना समर्थन वापस ले लिया। अजित चाहते हुए भी भाजपा के साथ नहीं जा पाए। देवेंद्र फडणवीस की सरकार गिर गई। 

उधर, एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बना ली। उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनाए गए, जबकि अजित पवार को डिप्टी सीएम का पद फिर से मिल गया। जब शिवसेना में दो फाड़ हुआ और वापस भाजपा की सरकार बनी तो अजित गुट में हलचल तेज हो गई। कई एक्सपर्ट कहते हैं कि अजित गुट चाहता है कि भाजपा के साथ मिलकर महाराष्ट्र में राजनीति करें, जबकि पवार ऐसा नहीं चाहते हैं। 

दो मई को शरद पवार ने अचानक अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। 24 घंटे तक इसको लेकर खूब गहमा-गहमी रही, बाद में नेताओं के कहने पर पवार ने अपना इस्तीफा वापस भी ले लिया। हालांकि, तभी ये तय हो गया था कि शरद पवार पार्टी में कुछ बड़ा करने वाले हैं।

बाद में, पार्टी के 25वें स्थापना दिवस समारोह पर शरद पवार ने दो कार्यकारी अध्यक्ष के नामों का एलान किया। इसमें एक बेटी सुप्रिया सुले हैं तो दूसरे पार्टी के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल का नाम है। सुप्रिया को केंद्रीय चुनाव समिति का प्रमुख भी बनाया गया। इस दौरान अजित को लेकर कोई एलान नहीं किया गया। अजित इससे काफी खफा थे। 

 

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