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Ex CM Tara Chand
– फोटो : संवाद
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डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी (डीएपी) में तीन वरिष्ठ नेताओं को निष्कासित करने के बाद आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। निष्कासित पदाधिकारियों में जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री तारा चंद ने डीएपी के चेयरमैन व जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके समर्थन में कांग्रेस से इस्तीफा देना एक बड़ी भूल थी। उन्होंने दावा किया कि डीएपी से उनके समर्थन में 126 सदस्य आए हैं और आगे और आएंगे। हम धर्मनिरपेक्ष सोच रखते हैं और अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लोगों की राय के बाद ही किसी पार्टी में शामिल होने का फैसला लेंगे।
गत दिवस डीएपी से पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में तारा चंद के साथ पूर्व मंत्री डॉ. मनोहर लाल और पूर्व विधायक बलवान सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। यहां शनिवार को पत्रकारों से रूबरू होते हुए तारा चंद ने कहा कि वे अपनी आखिरी सांस तक धर्मनिरपेक्ष रहेंगे और राहुल गांधी की अगुवाई वाली भारत जोड़ो यात्रा के जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने पर इसमें शामिल होने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। डीएपी द्वारा हमें बिना किसी कारण या औचित्य के निष्कासित करने का निर्णय हमारे लिए एक बड़ा आश्चर्य रहा है। हमारा आजाद के साथ एक लंबा रिश्ता रहा है। जब उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दिया, तो हमें लगा कि हमें अपने नेता के साथ खड़ा होना चाहिए और उन्हें नैतिक समर्थन देना चाहिए।
कांग्रेस ने मुझे जनादेश दिया, मुझे कांग्रेस विधायक दल का नेता, स्पीकर और उपमुख्यमंत्री बनाया, हमें आज अपने फैसले पर पछतावा है क्योंकि हमें लगता है कि हमने अपनी पार्टी से धोखा दिया, जबकि डीएपी ने हमें धोखा दिया है। डीएपी से उनकी बर्खास्तगी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा हमने अपने दशकों लंबे राजनीतिक करियर में इस प्रकार की तानाशाही नहीं देखी है। आजाद ने कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ बगावत की, एक त्र23 समूह की स्थापना की और यहां तक कि पत्र भी लिखे लेकिन उन्हें आंतरिक लोकतंत्र में विश्वास रखने वाली (कांग्रेस) पार्टी द्वारा बर्खास्त नहीं किया गया।
हमने उनके कहने पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जम्मू-कश्मीर) के अध्यक्ष का विरोध किया लेकिन पार्टी ने हमें कोई नोटिस नहीं दिया। हम डीएपी को मजबूत करने के लिए काम कर रहे थे। जिस पार्टी को अभी तक मान्यता नहीं मिली है और हम पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर बिना किसी सूचना के बर्खास्त कर दिया गया। आजाद जम्मू के कार्यक्रमों से दूर रहते थे। आजाद के फैसले का स्वागत करते हुए चंद ने कहा कि इसने उन्हें और मजबूत किया है और उन्हें पूरे जम्मू-कश्मीर से समर्थन मिल रहा है।
कश्मीर के कई और नेता जिनमें पूर्व मंत्री और डीएपी के विधायक और अन्य शामिल हैं, हमारे समूह में शामिल हो रहे हैं ताकि धर्मनिरपेक्ष वोट बैंक को मजबूत किया जा सके। हम संविधान और राज्य के अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जे सहित स्थानीय लोगों के नौकरियों और भूमि अधिकारों की बहाली के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे। जम्मू-कश्मीर को 5 अगस्त, 2019 से पहले की स्थिति में बहाल करना जम्मू-कश्मीर के दोनों क्षेत्रों के लोगों की प्रमुख मांग है।आजाद का नाम लिए बिना
उन्होंने कहा कि एक बड़ा नेता कह रहा है कि इसे बहाल नहीं किया जा सकता है, लेकिन हम उन्हें बताना चाहते हैं कि कुछ भी असंभव नहीं है। यह दोनों क्षेत्रों की लोकप्रिय मांग है और हम प्रधानमंत्री से इस मांग को स्वीकार करने और हमारी पहचान को बहाल करने की अपील करते हैं। वह पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं और उन्हें जम्मू-कश्मीर की आवाज सुननी चाहिए। तारा चंद ने कहा कि उनके सभी पार्टियों के साथ अच्छे दोस्ताना संबंध हैं क्योंकि वह किसी भी पार्टी को अछूत नहीं मानते।यह पूछे जाने पर कि क्या वह भाजपा में शामिल होना चाहेंगे उन्होंने कहा हम धर्मनिरपेक्ष हैं और धर्मनिरपेक्ष के रूप में मरेंगे। भाजपा या कांग्रेस या किसी अन्य पार्टी की ओर झुकाव रखने वाले नेताओं को जनता को धोखा दिए बिना
इनमें से किसी भी दल में शामिल होना चाहिए। हमारे यहां ऐसे नेता हैं जो जनता को गुमराह कर रहे हैं और एक विशेष पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए धर्मनिरपेक्ष मतों को बांट रहे हैं।हम जनता के साथ विश्वासघात नहीं करेंगे और हम किसी भी पार्टी की ए, बी या सी टीम के रूप में नहीं खेलेंगे। हम जनता से मिलेंगे और उनके परामर्श के बाद एक ऐसी पार्टी में शामिल होंगे जो धर्मनिरपेक्ष है और जम्मू-कश्मीर में अगली सरकार बनाने जा रही है।भारत जोड़ी यात्रा पर उन्होंने कहा कि जब नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला व अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों के नेताओं ने यात्रा में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है, जो देश को एकजुट करने के लिए है, हमें इसका हिस्सा बनने में कोई हिचकिचाहट नहीं है, हमें अभी तक कांग्रेस से किसी ने संपर्क नहीं किया है। इस दौरान बलवान सिंह और मनोहर लाल सहित अन्य समर्थक मौजूद थे।
तीन सालों से अलग पार्टी के लिए संघर्ष करते रहे तारा चंद : चिब
डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी (डीएपी) के महासचिव आरएस चिब ने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री तारा चंद, डा. मनोहर लाल और बलवान सिंह को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण ही डीएपी से निष्कासित किया गया है। उन्होंने कहा कि तीनों लोग पिछले तीन साल से कांग्रेस में रहकर अलग पार्टी में जाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। वह कांग्रेस की बैठकों से दूर रहे। गुलाम नबी आजाद पर अलग पार्टी बनाने का दबाव बनाया गया था और यही लोग उसमे शामिल थे। लेकिन डीएपी में आकर भी ये नेता पार्टी के खिलाफ काम कर रहे थे।
यहां शनिवार को पत्रकारों से रूबरू होते हुए पूर्व मंत्री जुगल शर्मा ने कहा कि उक्त तीनों नेता कांग्रेस के अंदर रहकर लड़ाई लड़ रहे थे। तारा चंद ने कांग्रेस प्रेदशाध्यक्ष बदलने के लिए समर्थन किया था। लेकिन आज तारा चंद की कथनी औ्र करनी में अंतर है। अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद आजाद ने गृहमंत्री को आड़े हाथ लिया था। तब जम्मू कश्मीर के अधिकारों के लिए आजाद को जम्मू कश्मीर में लाने का दबाव बनाया गया था। डीएपी में बनाए गए कई पदाधिकारी उक्त नेताओं की सूची से थे।
अपने ही वजन के नीचे गिर रही है डीएपी : वानी
कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष विकार रसूल वानी ने कहा कि डीएपी अपने ही वजन के नीचे गिर रही है, जिसकी जल्दी इसकी उम्मीद थी। जो लोद गुलाम नबी आजाद के साथ कुछ निकटता के कारण जुड़ गए थे उन्हें जल्द ही डीएपी के असली चेहरे का अहसास हो गया है। उनका काम सिर्फ धर्मनिरपेक्ष मतों को विभाजित करना और भाजपा की मदद करना है। आजाद के नेतृत्व वाले समूह से जुड़े लोग नकली नारों से ठगा महसूस कर रहे है। डीएपी को अभी तक पंजीकृत नहीं किया गया है और ईसीआई द्वारा मान्यता नहीं दी गई है, वह अकेले अपने दम पर खड़ी है। डीएपी से निष्कासित नेताओं को कांग्रेस में शामिल करने के सवाल पर वानी ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष सोच वाले लोगों के लिए पार्टी के दरवाजे हमेशा खुले हैं, हालांकि जरूरत पड़ने पर उचित समय पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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