[ad_1]

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : Social media
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक दंपती की तलाक की याचिका को स्वीकार कर लिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी ने अपने पति और परिवार के खिलाफ लगत और झूठे आरोप लगाए हैं। जिसकी वजह से परिवार को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। लगातार उन्हें पुलिस स्टेशन में बुलाए जाने की धमकी दी। यह क्रूरता का कार्य है, जो मानसिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने इस मामले पर फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पति की अपील को स्वीकार कर लिया। जिसमें पत्नी द्वारा क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की मांग करने वाली उसकी याचिका को खारिज कर दिया गया था।
तलाक को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि पत्नी ने पति और उसके परिवार को आपराधिक मामले में फंसाने के लिए सब कुछ किया। पत्नी, जिसने आरोप लगाया था कि उसके ससुर ने उसके साथ बलात्कार करने की कोशिश की। उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया। निंदनीय आरोपों को तार्किक निष्कर्ष पर नहीं ले जाया गया और उन्हें बीच में ही हटा दिया गया।
कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप झूठे प्रतीत होते हैं। क्योंकि कई पक्ष पुलिस स्टेशन गए। लेकिन इस घटना का कभी कोई उल्लेख नहीं हुआ। बिना किसी कारण के पत्नी सास-ससुर के साथ नहीं रहना चाहती थी।
[ad_2]
Source link