दुनिया देखना का इंतजार: जम्मू कश्मीर में नेत्र दाताओं की कमी, कार्निया जरूरतमंदों की लंबी हो रही सूची

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जम्मू-कश्मीर में नेत्र (कार्निया) प्रत्यारोपण के लिए जरूरतमंदों की सूची लंबी होती जा रही है। नेत्र दाताओं की कमी के कारण उन्हें नई दुनिया देखने का मौका नहीं मिल रहा है। हालांकि कश्मीर की तुलना में जम्मू संभाग के लोग अब नेत्रदान में रुझान दिखाने लगे हैं।

पिछले दो साल में जीएमसी जम्मू में तीन नेत्र दाताओं ने छह लोगों को नया जीवन दिया है। वहीं कश्मीर में कोई भी नेत्रदान के लिए आगे नहीं आया है। ये नेत्र मौत के छह घंटे के भीतर नेत्रदाता से लिए जाते हैं। इसमें उसके परिवार वालों का सहमत होना जरूरी होता है।

जम्मू संभाग में जीएमसी जम्मू और कमांड अस्पताल उधमपुर में नेत्र बैंक और प्रत्यारोपण की सुविधा है। इसी तरह कश्मीर संभाग में जीएमसी श्रीनगर में नेत्र बैंक व प्रत्यारोपण और एक निजी आई केयर एंड रिसर्च सेंटर में प्रत्यारोपण की सुविधा है। 

प्रत्यारोपण में कहीं से भी नेत्र (कार्निया) लेकर लेकर जरूरतमंद की आंखों में प्रत्यारोपण किया जाता है, जबकि अन्य मामले में मृतक या पहले से संकल्प लेने वाले नेत्र दाताओं की मौत के बाद उनके नेत्र दान कर दिए जाते हैं, लेकिन अभी इसमें जागरूकता के अभाव में लोग खुलकर आगे नहीं आ पाए हैं।

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एक नेत्रदाता के दो कार्निया से दो जरूरतमंदों को दो आंखें दी जाती हैं। 2022 में डायरेक्टर जनरल हेल्थ नई दिल्ली से पंजीकृत होने वाले जीएमसी जम्मू में थोटा 1994 के तहत अब तक तीन नेत्रदाताओं ने नेत्र दान किए हैं। यानी तीन कार्निया को छह लोगों को नई दुनिया देखने का मौका दिया गया। 

इस साल पंजीकृत हुए कमांड अस्पताल उधमपुर में दो नेत्रदाताओं के नेत्र लिए गए। जीएमसी श्रीनगर में 2022 में 9 और 2023 में अब तक 4 कार्निया के प्रत्यारोपण किए गए हैं और ये सभी कार्निया बाहर से मंगवाए गए। श्रीनगर के उक्त निजी सेंटर में 8 प्रत्यारोपण किए गए।

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