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माता महाकाली मंदिर में दहकते अंगारों पर प्रवेश कर दैवीय शक्ति का प्रदर्शन
– फोटो : संवाद
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हिमाचल प्रदेश में पुरानी मंडी स्थित माता महाकाली मंदिर में बुधवार रात को माता की 59वीं वार्षिक जाग मनाई गई। माता महाकाली, देवी उग्र तारा तरकवाड़ी तुंगल और माता काली चामुंडा स्कूल बाजार के रथों ने जाग में शिरकत की। सभी देवियों ने गूर और पुजारों के माध्यम से दहकते अंगारों पर प्रवेश कर दैवीय शक्ति का प्रदर्शन किया। भादो माह में देवताओं और आसुरी शक्तियों के बीच चल रहे युद्ध का वृतांत सुनाया।
इसमें बताया कि एक माह तक चल रहे युद्ध में आसुरी शक्तियां और देवता बराबरी पर हैं। इसका अंतिम परिणाम 19 सितंबर को देवधार स्थित देव बाला कामेश्वर मंदिर में होने वाली जाग में सुनाया जाएगा। मंदिर कमेटी के प्रधान पुनीत गुप्ता और उप सचिव नागेंद्र शर्मा ने बताया कि जाग में सैकड़ों लोगों ने देवी-देवताओं से आशीर्वाद लिया। इस दौरान भजन मंडलियों ने रात 12 बजे तक मंदिर में भजन-कीर्तन किया।
आग का पूजन देख रहे हैरान
रात 11 बजे सभी देवरथ, देवलुओं और कारदारों की मौजूदगी में जाग स्थल पर पहुंचे। यहां मंदिर कमेटी ने अग्नि का पूजन की। माता ने गूर पुजारों के माध्यम से आग में प्रवेश किया। इसे देख हर कोई अचंभित रह गया। दैवीय शक्ति के चलते गूर पुजारों को आग से किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। बाद में सभी देव रथ माता के मंदिर में विराजमान हुए और गूर पुजारों ने देववाणी करते हुए देवताओं और आसुरी शक्तियों के बीच चल रहे युद्ध का वृतांत सुनाया।
इस अवसर पर देवी महाकाली के गूर आयुष शर्मा, माता नैणा कथवाड़ी के गूर राजू, बबलू और माता काली चामुंडा के गूर जयचंद राणा, प्रधान सुंदरलाल, गुरदेव, गिरजा शर्मा और सहित अन्य देवी देवताओं के कारदार और देवलू मौजूद रहे।

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