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खाक चौक पर धूना तपस्या करते साधु और संन्यासी।
– फोटो : अमर उजाला
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माघ मेले में वसंत पंचमी पर्व पर धूना तपस्या के रूप में विशेष साधना, अराधना और तपस्या की गई, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। इस पूजा के लिए अघोरी पूरे साल का इंतजार करते है। संगम तट पर होने वाली यह तपस्या कई मायको में खास है और इसका विशेष महात्म्य भी है। वसंत पंचमी पर पंच अग्नि साधना का अपना एक अलग ही महत्व है। तपस्वी और महात्यागी परंपरा के संतों ने पंच अग्नि का घेरा बनाकर उसके बीच तपस्या आरंभ की। अग्नि के घेरे में कुछ संतों ने सिर पर भी मिट्टी के घड़ों में अग्नि प्रज्जवलित की। जेष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की दशमी यानी गंगा दशहरा के दिन इस तपस्या की पूर्णाहुति होगी।
सिर पर घड़ा रख ध्यान में लीन रहे संत
खाक चौक के तपस्वी नगर में कई शिविरों में धूना तपस्या आरंभ हुई। एक साथ कई संत अग्नि के घेरे में सिर पर घड़ा रखकर ध्यान में लीन नजर आए। यह अग्नि साधना तपस्वीनगर में माघी पूर्णिमा तक चलेगी। इस बार खाक चौक में कल्पवास करने वाले ऐसे तपस्वी संतों की संख्या बढ़ी है। संत अग्नि साधना को वह श्रेष्ठतम तप बताते हैं। उनका कहना है कि सात चरणों में होने वाली धूना तपस्या में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे से लेकर 12 घंटे तक संत अग्नि के घेरे में रहते हैं।
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