नगर निगम सोलन: कौन होगा मेयर-डिप्टी मेयर, गुटबाजी सुलझाने के लिए कांग्रेस ने भेजे तीन पर्यवेक्षक

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सोलन पहुंचे उद्योग मंत्री हर्षवर्धन सिंह, पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह और सीपीएस संजय अवस्थी।
– फोटो : संवाद

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नगर निगम सोलन का महापौर और उपमहापौर कौन होगा, इसका फैसला प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व लेगा। उधर, भाजपा में अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दोनों ही पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व ने रविवार को पार्षदों की गुटबाजी सुलझाने के लिए पूरी कोशिश की। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष राजीव बिंदल के साथ देर शाम बैठक हुई। इससे पहले कांग्रेस और भाजपा की कई बैठकें हो चुकी हैं।

पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि दोनों ही पार्टियां आमने-सामने की टक्कर में नहीं, बल्कि पार्षदों की आपसी गुटबाजी में उलझी हुई हैं। रविवार को कांग्रेस के तीन पर्यवेक्षक उद्योग मंत्री हर्षवर्धन सिंह, पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह और सीपीएस संजय अवस्थी पार्षदों की गुटबाजी सुलझाने सोलन पहुंचे।

मंत्री ने सभी की फिर से राय जानी और सभी पहलुओं पर चर्चा की। कांग्रेस की बैठक दोपहर 12:00 बजे सर्किट हाउस में हुई। रविवार को सभी पार्षद बैठक में पहुंचे। हालांकि बैठक में महापौर और उपमहापौर के नाम को लेकर असमंजस बना रहा। बैठक के खत्म होने के बाद मंत्री हर्षवर्धन सिंह के साथ सभी बाहर आए।

इस दौरान उन्होंने कहा कि विस्तार से चर्चा हुई है। फैसला हाईकमान पर सौंपा गया है। मुख्यमंत्री के समक्ष सभी बातों को रखा जाएगा। इसके बाद प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व ही महापौर और उपमहापौर के नाम पर मुहर लगाएगा। कोशिश रहेगी कि चार दिसंबर को महापौर और उपमहापौर नगर निगम सोलन को मिल जाएगा।

बैठक में भी दिखी गुटबाजी

बैठक के दौरान कांग्रेस की गुटबाजी साफ दिखाई दी। बैठक के लिए सभी पार्षदों को सर्किट हाउस बुलाया गया था। लेकिन पर्यवेक्षक के तौर पर आए दो मंत्रियों और एक सीपीएस के सामने दोनों गुट अलग-अलग बैठक में पहुंचे। साथ ही बैठक के लिए भी दोनों अलग-अलग ही बैठक कक्ष में गए।

कांग्रेस के पास विधायक का भी मत कांग्रेस की गुटबाजी सुलझ गई तो आराम से महापौर और उपमहापौर कांग्रेस का बन सकता है। क्योंकि कांग्रेस के पास पहले ही बहुमत है और विधायक का भी वोट है। ढाई साल पहले महापौर सरदार सिंह को बनाने के लिए आश्वासन कांग्रेस की ओर से दिया गया था। लेकिन इस समय स्थिति काफी बदली हुई नजर आ रही है।

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