नव्य अयोध्या, भव्य अयोध्या: पीढ़ियों के संघर्ष के बाद अब यूं हो रहा राम नगरी का कायाकल्प, इस तरह हो रहा विकास

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देश का राजनीतिक परिदृश्य परिवर्तित कर देने वाली अयोध्या 500 साल से परिवर्तन को तरस रही थी। पीढि़यों का संघर्ष अब मंदिर निर्माण के रूप में फलित हो रहा है। मात्र चार वर्ष में ही अयोध्या विकास के उस पथ पर अग्रसर है, जिसकी कल्पना मुदित करती है। संकरी गलियों के जाल से मुक्त रामलला के दरबार का विस्तार हो चुका है। कभी जेल नुमा रास्तों से रामलला के दरबार में पहुंचना पड़ता था। वर्तमान में 90 फीट चौड़ा आधुनिक सुविधाओं से युक्त पथ आस्था की राह सुगम कर रहा है। रामनगरी हर उस सुविधा से सुसज्जित हो रही है जो उसकी गरिमा के अनुकूल है। संत तो यहां तक कहते हैं कि अयोध्या का सुंदरीकरण या तो महाराज विक्रमादित्य ने कराया था, या फिर अब हो रहा है। आइए, एक नजर दौड़ाते हैं नव्य और भव्य अयोध्या पर। देखिए, क्या कुछ बदल गया, क्या बदलने वाला है।

भई सकल सोभा कै खानी

अवधपुरी प्रभु आवत जानी, भई सकल सोभा कै खानि… रामचरित मानस की यह पंक्ति यहां साकार रूप ले रही है। लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम जब अयोध्या लौट रहे थे, तब उनके आगमन की खुशी में रामनगरी इस तरह सजाई गई कि शोभा की खान हो गई थी। 22 जनवरी को रामलला की नए मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा है। अयोध्या में इसका उल्लास भगवान राम के आगमन जैसा ही है। सरकार के प्रयासों से रामनगरी को इस तरह सजाया और संवारा जा रहा है, जो निकट भविष्य में पूरी दुनिया को आकर्षित करेगी। रामजन्मभूमि परिसर कभी 70 एकड़ का था। राममंदिर के हक में फैसला आने के बाद मंदिर निर्माण शुरू हुआ तो धीरे-धीरे परिसर का विस्तार होता गया। आज रामजन्मभूमि परिसर करीब 100 एकड़ में विस्तारित हो चुका है।




राम की पैड़ी: गंदे नाले में तब्दील हो चुकी राम की पैड़ी को करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से सजाया गया है। यह अब आस्था के साथ पर्यटन का केंद्र बन चुकी है। यहां के पंपिंग स्टेशनों की क्षमता बढ़ाई गई है। हर शाम लेजर शो व लाइट एंड साउंड सिस्टम शो के जरिये रामकथा की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र होती है।


आकर्षित करेंगे मठ-मंदिर

– रामनगरी की समृद्ध स्थापत्यकला व प्राचीनता के गवाह मठ-मंदिरों की भी आभा लौट रही है। करीब 65 करोड़ की लागत से रामनगरी के 37 प्राचीन मंदिरों का सुंदरीकरण कराया जा रहा है। अगले कुछ ही महीनों में ये मंदिर भक्तों को आकर्षित करते नजर आएंगे।

सौर ऊर्जा और पार्किंग भी

– बदलती अयोध्या में रामनगरी की गलियों को भी चमकाया जा रहा है। 73 करोड़ की लागत से अयोध्याधाम के 15 वार्डों की गलियों को सौर ऊर्जा से जगमग करने की योजना पर काम शुरू हो चुका है।

– अयोध्या में कौशलेश कुंज पर एक, टेढ़ीबाजार में दो मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यहां भक्त अपने चारपहिया व दो पहिया वाहन पार्क कर सकेंगे।


राममंदिर की परिसर की विशेषताएं

-कुल निर्मित क्षेत्र- 57,400 वर्ग फीट

-मंदिर की लंबाई- 360 फीट, चौड़ाई- 235 फीट- ऊंचाई- 161 फीट

-कुल तल-तीन, प्रत्येक की ऊंचाई-20 फीट

-मंदिर में शिखर एवं मंडप- पांच

-श्रीराम गर्भगृह में बाल रूप में होंगे विराजमान

-लौह रहित राममंदिर निर्माण, प्राकृतिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल

-अपशिष्ट पदार्थों का समुचित प्रबंध

-हाईटेक प्रकाश व्यवस्था, भूमिगत जल प्रबंधन

-त्रिस्तरीय वृक्षारोपण, पुष्पवाटिका व नक्षत्रवाटिका

– बहुद्देशीय पार्किंग सुविधा

-सुरक्षित अमानती घर

-सौर ऊर्जा पटल, ऊर्जा उत्पादन केंद्र

-आपातकालीन चिकित्सा सहायता केंद्र

-बैंक, एटीएम, आवश्यक जनसुविधाएं

-आदर्श गोशाला, यज्ञशाला, तीर्थयात्री केंद्र

– रामलीला केंद्र, 360 डिग्री थियेटर व प्रोजेक्शन थियेटर


लता मंगेशकर चौक: रामनगरी का नयाघाट चौराहा अब लता मंगेश्कर चौक के नाम से प्रसिद्ध है। नयाघाट चौराहा पहले मात्र 30 फीट चौड़ा हुआ करता था। मेलों के दौरान यहां भीड़ नियंत्रण में पसीना छूट जाता था। वर्तमान में यह चौराहा 100 फीट चौड़ा हो चुका है। लता मंगेश्कर की स्मृति में चौक पर स्थापित 40 फीट लंबी वीणा भक्तों को आकर्षित करती है। यहां हमेशा लता मंगेशकर के भजन गूंजते रहते हैं।

रामकथा संग्रहालय: नयाघाट स्थित रामकथा संग्रहालय वर्षों से निष्प्रयोज्य पड़ा था। अब इसे श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को समर्पित कर दिया गया है। ट्रस्ट इसका नए सिरे से सुंदरीकरण कराने जा रहा है। यहां मंदिर आंदोलन का इतिहास दर्शाया जाएगा। अन्य सांस्कृतिक व धार्मिक गतिविधियां संचालित होंगी।

रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान: अयोध्या शोध संस्थान का नाम भी सरकार ने बदल दिया है। अब अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के नाम से इसे जाना जाएगा। 17 करोड़ की लागत से इसकी रिमॉडलिंग का काम चल रहा है। यहां भगवान राम से जुड़े साहित्य पर अध्ययन होंगे। रामलीला से जुड़े लोगों को रोजगार दिया जाएगा। संस्थान में विश्व के विभिन्न भाषाओं में रचित रामायण पर आधारित ग्रंथों, पुरातन परंपरा के वैदिक मंत्रों व इन पर लिखे गए विभिन्न टीकाओं पर अनुसंधान होगा। देश व विदेश के शोध छात्रों को जोड़ा जाएगा।

प्राचीन कुंडों की लौट रही गरिमा: रामनगरी की पौराणिकता के गवाह प्राचीन कुंडों का सुंदरीकरण कराया जा रहा है। इनमें से गणेश कुंड, हनुमानकुंड, स्वर्णखनि कुंड का अस्तित्व मिटने के कगार पर था। अब ये कुंड पर्यटन का केंद्र बन चुके हैं। सूर्यकुंड पर हर शाम लेजर शो देखने के लिए भीड़ उमड़ती है। इसी तरह दंतधावन कुंड, अग्निकुंड, खर्जुकुंड, विद्याकुंड की भी गरिमा लौट रही है। ये पर्यटन का केंद्र बन चुके हैं।


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