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नशा मुक्ति केंद्र
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
विस्तार
नशे के आदी युवाओं को सही राह दिखाने वाले नशा मुक्ति केंद्रों पर किसी का बस नहीं है। अब तक इनके लिए न कोई नियम थे न कायदे। ऐसे में अपनी मनमानी से ये युवाओं को सही राह पर लाने के बजाय मौत की अंधेरी गलियों में धकेल रहे हैं। ऐसे एक नहीं बल्कि दर्जनों मामले सामने आए जिनसे इन केंद्रों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए। दून के इन नशामुक्ति केंद्रों में हत्या तक के मामले सामने आ चुके हैं। प्रशासन ने हर कांड के बाद चेकिंग की और लापरवाही मिली। मगर, कार्रवाई करें तो किस नियम में यह बात प्रशासन की भी समझ में नहीं आई।
तीन वर्षों के कुछ मामले
मार्च 2023 : नया गांव स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में सहारनपुर के युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। भाई की तहरीर पर संचालकों पर केस।
अप्रैल 2023 : पटेलनगर क्षेत्र में नशा मुक्ति केंद्र में युवक की मौत। संचालकों ने शव युवक के घर के बाहर फेंका। चार लोगों पर दर्ज हुआ था मुकदमा।
नवंबर 2022 : मांडूवाला में स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में युवक ने फांसी लगाई। पता चला वहां पर प्रताड़ना होती थी।
अक्तूबर 2022 : वसंत विहार थाना क्षेत्र में एक नशा मुक्ति केंद्र से एकसाथ 10 युवा फरार हुए। कहानी सामने आई कि वहां इलाज के बजाय प्रताड़ना दी जाती थी।
अगस्त 2022 : तपस्थली स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र से चार युवती भागीं। एक मिली तो बताया कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ।
दिसंबर 2021 : लाइफ केयर नाम के नशा मुक्ति केंद्र में युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत।
ये सिर्फ इतने ही मामले नहीं हैं। इससे कहीं ज्यादा कांड इन नशा मुक्ति केंद्रों में दर्ज किए जा चुके हैं। क्लेमेंटटाउन, राजपुर, रायपुर क्षेत्र के नशा मुक्ति केंद्रों से कई बार युवक-युवतियों का फरार होना आम बात हो गई थी। पुलिस जब जांच करती थी तो पता चलता था कि यहां इलाज नहीं बल्कि उन्हें मारपीट कर नशा छोड़ने के लिए कहा जाता था। नियम कायदों के बिना चलने वाले इन नशा मुक्ति केंद्रों पर बार-बार दिशा निर्देश का भी कोई असर नहीं चलता था। यहां न डॉक्टर होते हैं न ही उन्हें बुलाया जाता है। ऐसा कई बार प्रशासन के औचक निरीक्षणों में सामने आ चुका है।
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