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बुधवार दोपहर गांव पहुंची सीएचसी और यूनीसेफ की टीम ने भूख से बिलखते बच्चों को खाना खिलाया और अपने साथ ले गई। आनन फानन मामला डीएम की चौखट तक भी पहुंच गया। यूनीसेफ के स्वास्थ्य कर्मी फिलहाल बच्चों की देखभाल कर रहे हैं।
सलावतपुर गांव निवासी शिवशंकर उर्फ लालू के परिवार में पत्नी मीसा, बेटा लवकुश(5) और बेटी मुस्कान(7) है। 14 मई को शिवशंकर शराब पीकर घर पहुंचा। पत्नी ने विरोध किया तो दोनों बच्चों के साथ उसे भी बुरी तरह से पीट कर लहूलुहान कर दिया।
इसके बाद मीसा कहीं चली गई। कुछ देर बाद शिवशंकर भी घर में ताला डालकर भाग निकला। इस दौरान दोनों बच्चों के बाहर खून से सने कपड़े में लहूलुहान हालत घर के बाहर बैठे रहे। एक रात बच्चों ने घर बिना खाना पीना के बिताई। सुबह बच्चों को भूख लगी।
तब वह उन्हीं कपड़ों में गांव के प्राथमिक विद्यालय में पहुंचे। वहां के शिक्षिका ने खून से सने कपड़े उतार कर दूसरे कपड़े पहनाएं और खाना लिखाया। छुट्टी होने के बाद दोनों फिर से घर पहुंचे, तो ताला पड़ा मिला। पूरा दिन बच्चे तेज धूप के बीच गांव में इधर-उधर घूमते दिखाई दिए।
रात होने पर गांव के पप्पू की नजर गई, तो वह बच्चों को अपने घर ले गए। दो दिन तक बच्चे वहीं रहें। बच्चों का कहना है कि मंगलवार रात उन्होंने कुछ भी नहीं खाया। बुधवार दोपहर बच्चे गांव में भूख से बिलखते नजर आए, तो लोगों ने सूचना दी।
तब अकबरपुर सीएचसी के स्वास्थ्य कार्यकर्ता और यूनिसेफ टीम की सदस्य प्रिया शर्मा बच्चों को लेकर विद्यालय पहुंची वहां शिक्षक ने पूरी घटना बताई। इसके बाद टीम ने बच्चों को बिस्कुट खिलाया और उपचार के लिए सीएचसी ले आई। वहां से डीएम नेहा जैन को मामले की सूचना दी।
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