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मृतक निष्ठा त्रिपाठी व मौजूद पुलिसकर्मी (फाइल फोटो)
– फोटो : amar ujala
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राजधानी लखनऊ के चिनहट स्थित दयाल रेजीडेंसी सोसाइटी में स्थित मकान नंबर ए-9 में निष्ठा की हत्या की गई थी। पुलिस ने शनिवार को मकान मालिक रिटायर्ड दरोगा भाइयों सुधांशु श्रीवास्तव व हिमांशु श्रीवास्तव से लंबी पूछताछ की, जिसमें कई अहम जानकारियां सामने आईं।
मकान मालिक ने गोरखपुर निवासी इंजीनियरिंग के छात्र नीलकमल को 18 हजार रुपये में मकान किराये पर दिया था। नीलकमल ने अपने स्तर से एक-एक कमरा चार-चार हजार रुपये पर किराये पर उठा दिया। इसमें आदित्य देव पाठक, मोनू गौतम और आदित्य शुक्ला शामिल हैं। शुरुआती जांच में मकान मालिक की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।
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एडीसीपी पूर्वी सैयद अली अब्बास के अनुसार, रिटायर्ड दरोगा भाइयों ने बताया कि दो महीने पहले उन्होंने नीलकमल को मकान किराये पर दिया था। उसका आधार कार्ड अपने पास रख लिया था। पुलिस के सामने उन्होंने उसका आधार कार्ड दिया। न एग्रीमेंट किया था और न ही सत्यापन कराया था। पूछताछ में बताया कि छात्र होने की वजह से किराये पर मकान दे दिया था। उसकी गतिविधियों के बारे में कोई शिकायत भी नहीं मिली थी। हिमांशु व सुधांशु मूलरूप से गोरखपुर के हैं और बीबीडी इलाके में स्थित दूसरे मकान में रहते हैं।
बड़ी लापरवाही, मकान में थे अपराधी, मालिक थे बेखबर
एडीसीपी ने बताया कि नीलकमल के बारे में भी हिमांशु व सुधांशु को ज्यादा जानकारी नहीं है। वहीं नीलकमल ने कमरे अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को दे दिए थे। एक तरह से उनको सिर्फ पैसों से मतलब था। हालांकि, वारदात के बाद पड़ोसियों ने बताया था कि मकान में रहने वाले नशेबाजी कर बवाल करते हैं। इसकी शिकायत मकान मालिक से की गई थी, लेकिन उनको हटाया नहीं गया। उधर, मकान मालिक शिकायत मिलने की बात से इनकार कर रहे हैं।
कॉल रिकॉर्ड से मिले अहम सुबूत
एडीसीपी ने बताया कि घटना के बाद आदित्य देव व मोनू बाइक से बेजान निष्ठा को लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचे थे। जैसे ही डॉक्टर ने उसको मृत बताया वैसे ही ये वहां से निकल गए। आदित्य देव ने आदित्य शुक्ला को कॉल कर निष्ठा की मौत की जानकारी दी। इसी दौरान उससे पिस्टल ठिकाने लगाने को कहा था। ये कॉल डिटेल बेहद अहम साक्ष्य हैं।
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