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तीसरी पीढ़ी कर रही पूजा
शहर के जीएम रोड स्थित 16 हजार वर्गफुट में इस वर्ष पूजा पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है. पूजा के दौरान शिव तांडव, महिषासुर वध व राधा-कृष्ण रासलीला का आयोजन होगा. समिति के महासचिव अर्जुन यादव बताते हैं कि वर्ष 1920 से श्री श्री दुर्गा पूजा संगीत समिति के तत्वाधान में यहां पूजा का आयोजन हो रहा है. इतिहास की बात करें तो पूजा के दौरान तबला वादक गोदई महाराज, बांसुरी वादक हरि चौरसिया, कथक नृत्यांगना माया चटर्जी, आदि विश्वप्रसिद्ध कलाकार आते थे. हालांकि, जिला प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने पर वर्ष 1984 सांस्कृतिक कार्यक्रम पर रोक लगा दी गई. इसके संस्थापक चुरामन यादव हैं. तीसरी पीढ़ी इस वर्ष पूजा का आयोजन कर रही है. यहां की झांकियां भी खास रहती है. पटना हवाई जहाज दुर्घटना, गुजरात में भूकंप, आदि कई झांकियों की प्रस्तुति से दी गई है.
वर्ष 1918 से ही पूजा का हो रहा आयोजन
शहर के कदमकुआं स्थित शिवालय मंदिर के पास श्री श्री दुर्गा पूजा कल्याण समिति के द्वारा वर्ष 1918 से ही पूजा का आयोजन किया जा रहा है. इस वर्ष समिति 106 वां वर्षगांठ पर बन रहे पंडाल को इको फ्रेंडली रखने की कोशिश कर रहे हैं. समिति के सदस्य सोहन व नरेश बताते हैं कि पंडाल में बांस, कपड़ा व अन्य प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है. भव्य सजावट के लिए बन रहे कलाकृतियों में भी प्राकृतिक चीजों का ही इस्तेमाल किया जा रहा है. मां दुर्गा को शिवालय मंदिर की तरह बन रहे पंडाल मे विराजेंगी.
130 वर्ष है बंगाली अखाड़ा पूजा समिति का इतिहास
शहर के बंगाली अखाड़ा पूजा समिति का इतिहास काफी पुराना है. यहां पर बंगाली पद्धति से वर्षों से मां की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना होते रही है. सर्वप्रथम वर्ष 1893 से माता का पूजन शुरु किया गया था. यहां स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजों से बचने के लिए कुश्ती करने के बहाने आंदोलन को लेकर रणनीति बनाते थे. वहीं, अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंकने के लिए उसी वर्ष नवरात्र के मौके पर मां की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना आरंभ की थी. यहां पर स्थापित होने वाली मूर्ति की खास बात है कि मां की सभी प्रतिमाएं एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं. इसका निर्माण कोलकाता के मूर्तिकार अशोक पाल बनाते रहे हैं. यहां लाखों की संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है.
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