पितृपक्ष में कौआ, गाय, कुत्ता और चींटी को आहार देना क्यों है जरूरी, जानें गयाजी में सीता कुंड का महत्व

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Pitru Paksha 2022 in Gaya: पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म करने से पितर की आत्मा की शांति मिलती है. मान्यता है कि गयाजी में पिंडदान करने पर पितर को स्वर्गलोग जाने की राह आसान हो जाता है. गरुड़ पुराण में कहा गया है कि पृथ्वी के सभी तीर्थों में गया सर्वोत्तम है. पितृपक्ष के दौरान पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण, ब्राह्मण भोज और दान कर्म किया जाता है. पितृपक्ष में गाय, कुत्ते, चींटी, कौवे आदि को आहार दने की परंपरा है. कहा जाता है कि मोक्ष की नगरी गया जी में पितृपक्ष के मास में भगवान राम ने भी राजा दशरथ जी का पिंडदान किया था.

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