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इंदिरा गांधी
– फोटो : SOCIAL MEDIA
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प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1961 में ही बेटी इंदिरा गांधी को राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने का मन बना लिया था। उन्होंने 1962 के तीसरे आम चुनाव के प्रचार में अपनी सक्रियता कम कर ली और पार्टी के बड़े नेताओं के साथ यह जिम्मेदारी इंदिरा गांधी को सौंप दी। नेहरू के निधन के बाद 1964 में इंदिरा पहली बार राज्यसभा के लिए चुनी गईं।
अमर उजाला के 3 फरवरी, 1961 के अंक में प्रकाशित समाचार के अनुसार, नेहरू ने अपनी भूमिकर सीमित कर इंदिरा गांधी को आगे किया था। उन्होंने पार्टी से कहा था कि वह ज्यादा चुनाव प्रचार नहीं करेंगे। उन्हें केवल कुछ चुनाव क्षेत्रों तक सीमित रखा जाए। इसकी वजह यह थी कि वह ज्यादा से ज्यादा अवसर इंदिरा को देना चाहते थे, जिससे कि भविष्य में नेहरू परिवार की विरासत को आगे बढ़ा सकें।
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