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माफिया अतीक अहमद
– फोटो : amar ujala
विस्तार
माफिया अतीक को अपने अंजाम का शायद पहले से ही अंदाजा लग गया था। वह अच्छी तरह से जानता था कि उसे भी एक दिन उसी पोस्टमार्टम हाउस आना है, जहां उस पर अपने विरोधियों को पहुंचाने के आरोप लगते रहते थे। उसके दिमाग में यह बात भी स्पष्ट तौर पर बैठी थी कि उसका अंत सामान्य तो नहीं ही होगा। वह अक्सर यह बातें अपने लोगों के बीच मजाकिया अंदाज में कहता रहता था।
वह चुनावी मंचों से भी ठेठ इलाहाबादी अंदाज में अपनी बातें रख ठहाके लगवाता था। अमे…तमे वाली भाषा में बात करने का उसका अंदाज-ए-बयां माफिया से राजनेता बनने के बाद भी कायम था। उससे जुड़ा एक वाकया स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल परिसर स्थित पोस्टमार्टम हाउस का है। करीब 21 वर्ष पहले वह अपने किसी परिचित के पोस्टमार्टम के दौरान वहां पहुंचा था। काफिले के साथ पोस्टमार्टम हाउस के गेट पर उतरते ही अतीक ने शवों का चीर-फाड़ करने वाले दो कर्मियों तक अपना संदेश भेजा।
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