[ad_1]

कर्फ्यू प्रतीकात्मक
विस्तार
ताला, तालीम और तहजीब के लिए मशहूर अपने शहर अलीगढ़ पर सांप्रदायिक दंगों के कई दाग हैं। आजादी के बाद के 76 साल यानि 1947 से लेकर 2023 तक के इतिहास पर गौर करें तो कुल 21 बार दंगे और 16 बार कर्फ्यू झेले हैं। इन जख्मों ने समय-समय पर जो नुकसान पहुंचाया, उनसे उद्योग-धंधे प्रभावित हुए और शहर कई वर्ष पीछे चला गया। ऐसे में जरूरत है उस अमन को कायम रखने की, जो पिछले 17 वर्ष से बरकरार है।
छुटपुट झगड़े फसाद की घटनाओं को छोड़ दें तो 2006 के बाद से यानि पिछले 17 वर्ष से शहर में अमन कायम है। इसी अमन की बदौलत हमारा शहर दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है। स्मार्ट सिटी के लिए इसका प्राथमिक चयन हुआ है। लगातार शहर स्मार्ट हो रहा है। अब बहुत हुआ। 17 साल के अमन को कायम रखो। शहर ने सर्वाधिक 100 दिन कर्फ्यू का दंश 2006 में झेला है। पुराने शहर के उन बुजुर्गों से पूछ लिया जाए, जिनका जीवन सांप्रदायिक विवादों में दर्ज हुए मुकदमों के बाद कचहरी के चक्कर लगाते-लगाते कट गया। उनकी रूह कांप उठती है। अब वे इस तरह का कोई फसाद नहीं चाहते हैं।

शहर में 1947 से 2006 तक दंगों का इतिहास
- 1971:लोकसभा चुनाव में दंगा। एक सप्ताह कर्फ्यू
- 5 अक्तूबर 1978: खेरेश्वर दंगल में विवाद में भूरा पहलवान की हत्या-दंगा भड़का, कर्फ्यू । इसके बाद दंगे और कर्फ्यू का क्रम रुक-रुक कर चलता रहा ।
- 6नवंबर 1978, 11 दिसंबर 1978, 5 मई 1979, 11 जून 1979 को भूरा हत्याकांड के क्रम में ही दंगे हुए दंगे के बाद एक सप्ताह कर्फ्यू लगा ।
- 1980:दही वाली गली में एक मीडियाकर्मी की गिरफ्तारी के बाद दंगा। इसके बाद दंगों का यह क्रम 1982 में जाकर उस समय रुका, जब डीएम आरआर शाह और एसएसपी यूबी सिंह की जोड़ी ने एनकाउंटर में 45 शातिर ढेर किए। इस तरह 1978 से लेकर 1982 तक यह दंगों और कर्फ्यू का सबसे लंबा दौर अलीगढ़ ने झेला।
- इसके बाद बीच में एक बार दही वाली गली में मामूली झगड़ा हुआ। मगर शांत कर लिया गया।
- 1990:पूरे प्रांत में दंगा भड़कने की कड़ी में दंगा। रुक-रुककर एक माह के लिए कर्फ्यू ।
- 1991: दंगा और रुक-रुककर एक माह कर्फ्यू ।
- 1992:अयोध्या में विवादित ढांचा गिरने के बाद एक सप्ताह एहतियातन कर्फ्यू।
- 1995:सराय सुल्तानी में बारात की बस में लूट के बाद दंगा। एक सप्ताह के लिए कर्फ्यू।
- 2002:गोधरा कांड के फेर में दंगा 25 दिन कर्फ्यू ।
- 2003:रोरावर में रास्ते के विवाद में झगड़े के बाद दंगा । एक माह के लिए कर्फ्यू ।
- 6 अप्रैल 2006:दही वाली गली में मंदिर सजाने के विवाद में दंगा। सिलसिलेवार दंगों की कड़ी में सबसे ज्यादा 100 दिन कर्फ्यू लगने का इतिहास।
2006 के बाद बिना कर्फ्यू के ये सांप्रदायिक टकराव
- 2015 में खटीकान में गोवर्धन पूजा की शाम छेड़खानी पर उपद्रव, फायरिंग में एक की मौत।
- 2016 में बाबरी मंडी में गोवर्धन पूजा की शाम छेड़खानी पर उपद्रव, जमकर फायरिंग की गई।
- 2017 में रेलवे रोड पर दो भाइयों की हत्या के बाद ऊपरकोट पर पुलिस से टकराव, फायरिंग।
- 2019 में एएमयू में जिन्ना प्रकरण को लेकर टकराव, एएमयू छात्रों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
- 2019 के अंत से 2020 तक सीएए-एनआरसी प्रकरण को लेकर शहर में कई जगह टकराव।
- 2020 में ऊपरकोट पर टकराव के दौरान बाबरी मंडी में एक युवक की मौत पर टकराव हुआ।
मगर लगा ई कर्फ्यू
यह बात सही है कि 2006 के बाद शहर के लोगों ने समझदारी का परिचय दिया और शहर में कहीं कोई ऐसा फसाद नहीं हुआ, जो शहर के माहौल को बिगाड़े और कर्फ्यू की जरूरत महसूस हो। मगर जिन्ना प्रकरण और सीएए-एनआरसी प्रकरण में दो बार घटनाक्रम ऐसे जरूर हुए कि अफवाहों पर विराम के लिए इंटरनेट का कर्फ्यू जरूर प्रशासन को लगाना पड़ा। मतलब इंटरनेट प्रतिबंधित किया गया। जिससे सोशल मीडिया पर अफवाहों पर विराम लगाया जा सके।
[ad_2]
Source link