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आग की लपटों की वजह से मुख्य दरावाजे से वह और मौके पर जुटे आसपास के लोग झोपड़ी के भीतर नहीं घुस सके। दूसरी तरफ से परिवार को निकालने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो पाए और आंखों के सामने उनका पूरा परिवार देखते ही देखते खत्म हो गया। आग कैसे लगी, वह नहीं जानते हैं।
इधर, परिवार के पांच सदस्यों की मौत की खबर सुनते ही जिला अस्पताल में भर्ती रेशमा भी दहाड़े मार कर रो पड़ी। देर रात अस्पताल पहुंची डीएम नेहा जैन, एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति व अन्य अधिकारियों ने बेटे, बहू, पौत्रों व पौत्री की मौत से दुखी रेशमा को सांत्वना दी।
ऊंची-ऊंची लपटें देख डर गए लोग
प्रत्यक्षदर्शी रमेश नायक के मुताबिक आधी रात में शोर शराबा होने लगा। मेरा घर प्रकाश के घर से कुछ दूरी पर है। शोर सुनकर मैं और आसपास के कई लोग मौके पर आ गए। वहां पर झोपड़ी धू-धू कर जल रही थी। ऊंची-ऊंची लपटें उठ रही थीं। रेशमा झोपड़ी के बाहर झुलसी हालत में माथा पटक कर चिल्ला रही थी।
झोपड़ी के दरवाजे की कुंडी अंदर से बंद थी। दरवाजे के पास ही छप्पर था, पहले आग दरवाजे की तरफ बढ़ी। उसके बाद पूरी झोपड़ी को लपटों ने चपेट में ले लिया। छप्पर टूटकर गिरा, तो भीतर सो रहे पांच लोग फंस गए। रमेश ने बताया गांव में पानी की व्यवस्था कम है। इसलिए भी तुरंत आग पर काबू नहीं पाया जा सका।
फोरेंसिक, डॉग स्क्वाड व पुलिस जांच में जुटी
आग लगने के बाद एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति के साथ फोरेंसिक टीम, डॉग स्क्वाड और पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर जांच करने पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने मौके से जला हुआ बिजली का तार समेत कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। डॉग स्क्वाड भी अपने तरीके से पड़ताल की।
पीड़ित परिवार को दी जाएगी सहायता
डीएम नेहा जैन ने मौका मुआयना करने के बाद कहा कि झोपड़ी में आग लगने से माता-पिता व तीन बच्चे जिंदा जल गए हैं। शुरुआती जानकारी में शार्ट सर्किट से आग लगने की बात सामने आई है। फिलहाल आग लगने की सही वजह विस्तृत जांच के बाद सामने आ सकेगी।
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