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लाखों की आबादी के बीच रास्ता बनाने वाला मालन पुल अवैध खनन की भेंट चढ़ गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के उत्तर व दक्षिण दिशा में लगातार अवैध खनने से बड़े गड्ढ़े बन गए थे, जिससे मालन पुल के पिलर नंबर नौ और 10 लगातार कटाव झेल रहे थे। मिट्टी खिसकने से पिलर की जड़ें कमजोर हो गई थीं।
Kotdwar: भारी बारिश के बाद मालन पुल टूटने से नदी में बहे युवक का शव बरामद, दो लोग अभी भी लापता
विभागीय अधिकारी भले ही मालन पुल टूटने का कारण बाढ़ और कटाव बता रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि लोक निर्माण विभाग अपने पुल को बाढ़ व अवैध खनन से नहीं बचा पाया। एक सप्ताह पहले नदी का बहाव नियंत्रित करने को चैनेलाइजेशन का काम शुरू कराया गया था लेकिन नौ और 10 नंबर के पिलरों की ओर ध्यान नहीं दिया।
मोटाढांक में 325 मीटर स्पान का यह डबल लेन मोटर पुल क्षेत्रवासियों की मांग पर 24 मई 2010 में बनकर तैयार हुआ था। पुल बनने से पहले क्षेत्रवासी यहां बने रपटे से आवाजाही करते थे। बरसात के दिनों में यहां आवागमन ठप रहता था जिसे देखते हुए राज्य सरकार ने यहां पर 12.35 करोड़ की लागत से पुल का निर्माण कराया।
अब पुल टूटने से भाबर के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। क्षेत्रवासी पुल टूटने की वजह लोक निर्माण विभाग की उदासीनता बता रहे हैं। कहा कि पुल को पहले से ही खतरा बना था, ऐसे में उनकी समय रहते उचित देखरेख नहीं की गई इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
जब पुल टूटा उससे पहले बड़ी संख्या में लोग उफनाई नदी को देखने पहुंचे थे। इस दौरान एक युवक की नदी में बहने से मौत हो गई। वहीं, दो अब भी लापता हैं। उधर, पुल के ढहने के बाद अब इस मामले में राजनीति शुरू हो गई है।
कांग्रेस के साथ ही यूकेडी के पदाधिकारियों ने मालन पुल के ढहने के लिए अवैध खनन और अधिकारियों की हीलाहवाली करार दिया। यूकेडी के वरिष्ठ नेता डॉ. शक्तिशैल कपरवाण और महेंद्र सिंह रावत ने कहा कि स्थानीय प्रशासन व लोनिवि की उदासीनता आम जनता पर भारी पड़ रही है।
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