बुंदेलखंड: सियासत में आधी आबादी को दलों ने रखा पीछे, 16 चुनाव में सिर्फ पांच बार संसद पहुंची महिलाएं

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Parties left half the population behind in politics, women reached Parliament only five times in 16 elections

पूर्व महिला सांसद सुशील नय्यर व उमा भारती
– फोटो : अमर उजाला

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बुंदेलखंड की सियासत में नारी शक्ति सिर्फ वंदन तक ही सीमित रही है। अब तक हुए 16 लोकसभा चुनाव में सिर्फ तीन महिलाओं को ही पांच बार संसद पहुंचने का अवसर मिला। कभी राजनीतिक दलों ने टिकट देने में कंजूसी दिखाई तो कभी मतदाताओं ने ही महिलाओं की दावेदारी को नकार दिया।

बुंदेलखंड में लोकसभा की चार सीट है। बुंदेलखंड की सीटों में 1957 में झांसी से पहली महिला सुशीला नैय्यर चुनाव लड़ी और जीती। 1962 में महिलाओं ने कांग्रेस के टिकट पर बुंदेलखंड की दो सीटों में अपना परचम लहराया। झांसी से जहां सुशीला नय्यर तो वहीं बांदा-चित्रकूट संसदीय क्षेत्र से सावित्री निगम चुनाव जीतीं। 1967 में कांग्रेस ने पुन: झांसी से सुशीला नय्यर को टिकट दिया और वह चुनाव जीतीं। 1977 में सुशीला नय्यर जनता पार्टी प्रत्याशी से चुनाव हार गईं। 1977 के बाद 2014 तक बुंदेलखंड में प्रमुख राजनीतिक दलों ने महिलाओं को टिकट नहीं दिए।

2014 में भाजपा ने मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को झांसी से चुनाव लड़ाया। चुनाव जीतकर संसद पहुंची। 2009 में सपा ने बांदा से अमिता बाजपेयी को मैदान में उतारा, लेकिन वह चुनाव हार गई। बुंदेलखंड की महोबा-हमीरपुर व झांसी की जालौन संसदीय सीट से कभी महिला सांसद नहीं बनी।

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