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– फोटो : सोशल मीडिया
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जम्मू विश्वविद्यालय के अधीन गवर्नमेंट डिग्री (पीजी) कॉलेज भद्रवाह में अगले सत्र से पुस्तकालय विज्ञान, लोक प्रशासन और शारीरिक शिक्षा का यूजी कोर्स शुरू होगा। प्रत्येक कोर्स में 40 सीटें निर्धारित की गई हैं। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. केके शर्मा ने कुछ महीने पहले कोर्स को मंजूरी दिलाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा था। इसे अब मंजूरी मिल चुकी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत छात्रों को अब नए विषय पढ़ने का भी मौका मिलेगा।
प्राचार्य ने कहा कि फारसी, हिंदी, उर्दू, आदि विषयों में छात्रों की कम रुचि है। उनकी रुचि को बढ़ाने के उद्देश्य से इन कोर्स को शुरू करने का फैसला लिया है। पुस्तकालय विज्ञान की पढ़ाई कर छात्र पुस्तकालय के क्षेत्र में रोजगार तय कर सकते हैं। मौजूदा समय में इस विषय का ज्ञान होना छात्रों को अनिवार्य है। पुस्तकालय में जाकर छात्र पढ़ाई तो करते हैं, लेकिन उन्हें सिद्धांत के बारे में कम जानकारी होनी होती।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा लोक प्रशासन विषय में छात्रों को प्रशासनिक प्रणाली के बारे में पढ़ने का मौका मिलेगा। राजनीति विज्ञान के साथ इस विषय का भी चयन कर सकेंगे। प्रतियोगी परीक्षाओं में भी छात्रों को यह विषय मदद करेगा। वहीं, कॉलेज में खेल गतिविधियां सालों से चल रही हैं, लेकिन शारीरिक शिक्षा की पढ़ाई से छात्र महरूम थे। अब शारीरिक शिक्षा भी पढ़ाई जाएगी। इसके अलावा जियोलॉजी विषय भी शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए मूल ढांचा विकसित किया जाएगा।
होटल मैनेजमेंट और पर्यटन में भी कोर्स शुरू करने का विचार
पर्यटन की दृष्टि से भद्रवाह की अपनी पहचान है। इसके सौंदर्य और वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए कॉलेज में अन्य कोर्स शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। प्राचार्य ने कहा कि होटल मैनेजमेंट और पर्यटन विषय में कोर्स शुरू करने का विचार किया जा रहा है। इन कोर्स की मदद से छात्रों को स्वरोजगार में भी मदद मिलेगी।
भद्रवाह कॉलेज में संस्कृत विषय 2020 से बंद
प्राचार्य का कहना है कि अधिकांश छात्र भूगोल, राजनीति विज्ञान, समाज शास्त्र और अंग्रेजी जैसे पेशेवर विषयों का चयन करते हैं। कॉलेज में छात्र संस्कृत की पढ़ाई नहीं करते थे। इस कारण 2020 में इस विषय को बंद कर दिया गया। इस बार फारसी विषय में यूजी के करीब छह छात्रों ने दाखिला लिया है। अरबी और फारसी में पीजी भी शुरू करने की मांग की जा रही थी, लेकिन छात्रों की संख्या कम होने के कारण पीजी संभव नहीं।
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