भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाइन: गोबिंद सागर झील के किनारे 5.5 किमी रेल ट्रैक वायाडक्ट, पुलों पर ही बिछेगा

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bhanupali bilaspur railway track 5.5 kilometer Viaduct near gobind sagar lake

भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेललाइन (फाइल फोटो)
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


भानुपल्ली-बैरी रेल लाइन का गोबिंद सागर झील के किनारे का साढ़े पांच किलोमीटर लंबा ट्रैक पुलों और वायाडक्ट पर ही बिछाया जाएगा। बिलासपुर के मंडी-भराड़ी से बध्यात तक छह किलोमीटर लंबी पटरी बिछाई जाएगी। इसमें सिर्फ आधा किलोमीटर ट्रैक ही जमीन पर होगा। वहीं, बध्यात में इस रेल लाइन का सबसे लंबा रेलवे स्टेशन बनाया जाएगा। रेल विकास निगम ने तीन कंपनियों को पुल, वायाडक्ट और स्टेशन निर्माण कार्य आवंटित कर दिया है।

मंडी-भराड़ी से बध्यात तक आठ पुल और दो वायाडक्ट बनाए जाने हैं। इनकी लागत करीब 500 करोड़ रुपये आएगी। रेल विकास निगम ने मंडी-भराड़ी के पास बन रही रेल लाइन की सुरंग नंबर 10 से आगे तीन किलोमीटर लंबे पुलों और वायाडक्ट का निर्माण कार्य एसपीएल कंपनी को आवंटित किया है। इससे आगे ढाई किलोमीटर लंबाई के पुलों और वायाडक्ट बनाने का काम एजी इंफ्रा कंपनी को दिया है, जबकि बध्यात में बनने वाले स्टेशन का काम मैक्स कंपनी करेगी।

इन कंपनियों ने अपने अस्थायी कार्यालय बनाने शुरू कर दिए हैं। इनकी मशीनरी भी पहुंचना शुरू हो गई है। मंडी-भराड़ी से पहला वायाडक्ट शुरू होगा। इसके बाद पुलों का निर्माण होगा, जो बिलासपुर के नाले के नौण में व्यास गुफा के पास खत्म होंगे। व्यास गुफा के पास से दूसरा वायाडक्ट शुरू होगा, जो लुहणू मैदान तक होगा। इसके बाद पुलों का निर्माण लुहणू से खैरियां तक होगा। खैरियां से बध्यात तक सिर्फ आधा किलोमीटर ट्रैक जमीन पर होगा। बध्यात में स्टेशन का निर्माण किया जाएगा। गोबिंद सागर झील के एकदम किनारे पुलों और वायाडक्ट पर बनने वाले रेल ट्रैक से प्राकृतिक सुंदरता का नजारा दिखाई देगा।

हाईकोर्ट के आदेश पर रुका भूमि अधिग्रहण 

भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल लाइन के निर्माण के लिए बध्यात से आगे 10 गांवों की 538.13 बीघा भूमि का अधिग्रहण होना है, लेकिन हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई को अंतिम रूप देने पर रोक लगा दी है, जिससे यह प्रक्रिया रुक गई है। अदालत ने राज्य सरकार के अलावा केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस मामले की सुनवाई 18 जुलाई को होगी। याचिकाकर्ता ने उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिग्रहण के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

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