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भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह।
– फोटो : amar ujala
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महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह ने अदालत के समक्ष तर्क रखा है कि निरीक्षण समिति (ओसी) ने रिपोर्ट के सात दिन के भीतर एफआईआर की सिफारिश नहीं की। यह दोषमुक्ति के समान है। उन्होंने यह भी कहा कि निरीक्षण समिति पीओएसएच अधिनियम के तहत आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की क्षमता में काम कर रही थी। इसमें आरोपी बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं पाया गया है।
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने कुछ दलीलें सुनने के बाद मामले को आगे की बहस के लिए 30 अक्तूबर को सूचीबद्ध किया। पिछली तारीख से दलील जारी रखते हुए आरोपी के वकील राजीव मोहन ने दोहराया कि निगरानी समिति पीओएसएच के तहत आईसीसी के समान है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि प्रतिवादी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला पाया जाता है, तो आईसीसी सात दिनों के भीतर उपरोक्त प्रतिवादी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश करेगी। चूंकि इस मामले में ऐसी कोई सिफारिश नहीं की गई है, इसलिए यह मान लेना सुरक्षित है कि पीओएसएच के तहत आईसीसी की क्षमता में काम करने वाली निरीक्षण समिति को आरोपी बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला नहीं मिला।
दूसरी ओर अतिरिक्त लोक अभियोजक ने कहा कि संविधान समिति पीओएसएच अधिनियम की धारा 4 के अनुरूप नहीं है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि यह आईसीसी है। दूसरे दोषमुक्ति का कोई सवाल ही नहीं है, क्योंकि समिति ने कोई निष्कर्ष नहीं दिया था।
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