मुड़िया पूर्णिमा मेला: एक बार फिर जीवंत हो उठी 466 साल पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा, भक्तों ने की पुष्पवर्षा

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Devotees thronged to see procession of Mudiya saints dancing and chanting Harinam in Mathura

मुड़िया पूर्णिमा मेला: एक बार फिर जीवंत हो उठी 466 साल पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा
– फोटो : अमर उजाला

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तीर्थनगरी मथुरा में ढोल, मजीरा, मृदंग की थाप नाचते और हरिनाम करते मुड़िया संत, पीछे श्रद्धालुओं का रैला और पुष्प वर्षा करते अनुयायी। कुछ ऐसा ही दृश्य था सोमवार सुबह और शाम को निकली मुड़िया संतों की शोभायात्रा का। सबसे आगे बग्घी में सनातन गोस्वामी के चित्रपट की भव्य झांकी सजाई गई। मानसी गंगा की परिक्रमा करते हुए मुड़िया संतों ने चकलेश्वर से ऐतिहासिक शोभायात्रा प्रारंभ की। देशभर से आए लाखों श्रद्धालु इस शोभायात्रा के साक्षी बने। इसी के साथ पांच दिवसीय 467वें मुड़िया मेले का समापन हो गया।

मुड़िया संतों ने शोभायात्रा निकाल कर 466 वर्ष पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वाह किया। महंतों की अगुवाई में निकली शोभायात्रा में मुड़िया संत नाचते-गाते हुए चल रहे थे। वाद्य यंत्रों की धुन पर सनातन गोस्वामी के डोले के साथ नगर में भ्रमण किया। इस दौरान जगह-जगह लोगों ने शोभायात्रा का पुष्पवर्षा करके स्वागत किया। इस बीच मुड़िया संतों ने चकलेश्वर महादेव की पूजा की। 

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