मेडिकल कॉलेज के गेट पर तोड़ा दम: अस्पताल था और डॉक्टर भी…बस नहीं थी इंसानियत, नवजात बच्ची को मिल जाता इलाज तो बच जाती जान

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newborn girl had got treatment in Medical College Etah her life would have been saved

मेडिकल कॉलेज एटा
– फोटो : अमर उजाला

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एटा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव बाद हालत चिंताजनक बताते हुए प्रसूता और नवजात बच्ची को रेफर कर दिया गया। परिजन एटा मेडिकल कॉलेज लाए। लेकिन यहां करीब 45 मिनट तक इन्हें भर्ती ही नहीं किया गया। नवजात की नाजुक जान इतनी उपेक्षा बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसकी मौत हो गई। महिला का इलाज भी परिजन ने एक निजी अस्पताल में कराया। यहां खर्चा अधिक होने पर पूरा इलाज कराए बिना घर ले गए।

जैथरा थाना क्षेत्र के गांव गढि़या सुहागपुर निवासी सुरजीत की पत्नी रूबी (25) को परिजन रविवार की शाम जैथरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लाए। यहां उसका सामान्य प्रसव तो हो गया। लेकिन महिला में खून की कमी के कारण हालत बिगड़ गई। वहीं नवजात बच्ची में ऑक्सीजन की कमी स्टाफ ने बताई। दोनों को एटा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। परिजन भाड़े पर निजी गाड़ी कर शाम के समय मेडिकल कॉलेज पहुंचे। सुरजीत के चाचा रामविलास ने बताया कि इमरजेंसी केस होने के बावजूद अस्पताल का कोई स्टाफ पूछने तक नहीं आया। हम लोगों ने बात की तो खून की कमी बताकर भर्ती करने से ही इनकार कर दिया। कहा कि खून का इंतजाम कर लाओ, तभी भर्ती करेंगे। खून की व्यवस्था नहीं हो रही थी। कहा कि इस सबमें करीब 45 मिनट का समय बीत गया और बच्ची को भी इन लोगों ने भर्ती नहीं किया गया। 

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