यूपी : एनजीओ पर धन उगाही का आरोप, हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

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UP: NGO accused of extortion, High Court issues notice

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैर सरकारी संगठनों द्वारा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का सख्ती से अनुपालन करने की मांग वाली जनहित याचिका पर प्रतिवादी गैर सरकारी संगठनों को नोटिस जारी करते हुए उनसे 24 नवंबर तक जवाब तलब किया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कमलराज भेड़-बकरी कल्याण एसोसिएशन की ओर से गैर सरकारी संगठनों द्वारा मवेशियों को जब्त कर उनके नाम पर अवैधानिक लाभ अर्जित करने के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

याचिकाकर्ता ने मांग की कि जानवरों को जब्त करने के लिए राज्य सरकार को विस्तृत दिशानिर्देश तैयार करने चाहिए और निजी एनजीओ को संबंधित मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना ऐसे जानवरों को रखने से रोकने का आदेश करना चाहिए। याचिकाकर्ता संगठन का दावा है कि वह मवेशियों और अन्य जानवरों की देखभाल में शामिल लोगों को सहायता प्रदान करता है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई पंजीकृत और अपंजीकृत गैर सरकारी संगठनों और अन्य संस्थानों द्वारा विभिन्न अनैतिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उनके द्वारा जानवरों को इलाज और देखभाल मुहैया कराने के नाम पर जब्त तक लिया जाता है और फिर आर्थिक लाभ के लिए अवैध गतिविधियां संचालित की जाती हैं।

याचिका में यह दलील दी गई है कि जानवरों की कस्टडी लेने वाले संगठनों को सरकारी अधिकारियों द्वारा विनियमित किया जाना चाहिए, ताकि इस बात की जांच की जा सके कि ऐसे संस्थान पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 में निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

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