[ad_1]

लाट साहब का जुलूस (फाइल)
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शाहजहांपुर में चौक से निकलने वाले जुलूस में शामिल होने के लिए बड़े लाट साहब की रामपुर से आमद हो गई है। अधिकारियों के कहने पर उनका मेडिकल कराने के बाद आयोजक खातिरदारी में जुट गए हैं। पुलिस ने लाट साहब के जुलूस के रास्ते के घरों की छतों से ईंट-पत्थर और गमले हटवा दिए हैं।
300 साल पुरानी है परंपरा
होली पर लाट साहब का जुलूस निकालने और नवाबों के साथ होली खेलने की परंपरा की कोई निश्चित तिथि तो इतिहास में दर्ज नहीं है, लेकिन यह परंपरा करीब 300 साल पुरानी बताई जाती है। परंपरा के तहत एक युवक को लाट साहब बनाकर भैंसागाड़ी पर बैठाया जाता है। जूते-चप्पलों की माला पहनाकर पूरे शहर में उसका जुलूस निकाला जाता है। जुलूस के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहती है।
होली पर बड़े और छोटे लाट साहब के जुलूस पूरी शान से निकाले जाते हैं। त्योहार से 15 दिन पहले ही लाट साहब के जुलूस की तैयारी शुरू हो जाती है। इस बार तीन युवक बड़े लाट साहब बनने के लिए तैयार हुए थे। बृहस्पतिवार को रामपुर से बड़े लाट साहब की आमद हुई। आयोजकों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराने के बाद उनकी खातिरदारी शुरू कर दी है।
[ad_2]
Source link