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हेमवती नंदन बहुगुणा
– फोटो : amar ujala
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लोकसभा लखनऊ की खासियत अलग है। इस सीट पर हर क्षेत्र के पुरोधा अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। मतदाताओं ने भी बदलते दौर के साथ अपना मिजाज बदला, जिसके परिणाम भी चौंकाने वाले सामने आए। लोकसभा चुनाव शुरू होने के बाद वर्ष 1977 में हेमवती नंदन बहुगुणा ऐसे प्रत्याशी थे, जिन्होंने इस सीट पर सबसे ज्यादा वोट से चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया था, जो 47 वर्ष तक कायम रहा।
लखनऊ की इसी सीट पर वर्ष 2014 में बहुगुणा की बेटी रीता बहुगुणा को कांग्रेस ने टिकट दिया। रीता ने चुनाव लड़ा, लेकिन वह भाजपा प्रत्याशी राजनाथ सिंह से रिकॉर्ड मतों से हार गईं। पिता ने जीत का रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन बेटी उससे भी ज्यादा मतों से हार गईं। दरअसल, हेमवती नंदन बहुगुणा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी व इंदिरा गांधी की मामी शीला कौल को सर्वाधिक 1,65,345 वोट से हराया था। वहीं, वर्ष 2014 में राजनाथ सिंह को कुल 5,61,106 वोट मिले थे, जबकि रीता बहुगुणा को 2,88,357 मतों से ही संतोष करना पड़ा था।
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आठ बार जीती भाजपा, छह बार कांग्रेस
भाजपा आठ बार लखनऊ सीट जीत चुकी है। वहीं, कांग्रेस छह बार विजयी हुई है। वर्ष 1991 में कांग्रेस के टिकट पर विजय लक्ष्मी पंडित ने जीत हासिल की थी। इसके बाद शिवराजवती नेहरू, पुलिन बिहारी बनर्जी और बीके धवन ने सांसद बनकर कांग्रेस का परचम लहराया। वर्ष 1967 में निर्दलीय प्रत्याशी आनंद नारायण मुल्ला ने बाजी अपने नाम की। हालांकि, 1971 में शीला कौल ने कांग्रेस को जीत दिलाई। इसके बाद जनता पार्टी से हेमवती नंदन बहुगुणा सांसद रहे। हालांकि, उन्हें हराकर शीला कौल लगातार दो बार सांसद रहीं। 1989 में जनता दल से मांधाता सिंह ने जीत दर्ज की, लेकिन 1991 में अटल बिहारी वाजपेयी के जीतने के बाद भाजपा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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