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leh ladakh
– फोटो : istock
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भारत-चीन सीमा पर अब पर्यटकों को खाने-पीने समेत कॉफी पीने का मौका भी मिलेगा। केंद्र सरकार बार्डर टूरिज्म को प्रमोट करने और अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा के तहत सीमावर्ती इलाकों में कैफे खोलने जा रही है।
अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर कैफे बनाने का काम सीमा सड़क संगठन( बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन) करेगा। इसीलिए इसे बीआरओ कैफे का नाम दिया जा रहा है। देशभर में 75 स्थानों पर बीआरओ कैफे बनेंगे। इसमें से 25 पूर्वोत्तर में बनेेंगे, जिसमें अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मणिपुर, नगालैंड, असम, मिजोरम शामिल हैं। खास बात यह है कि अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से सटे हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, राजस्थान, पंजाब व गुजरात के गांवों में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत शिक्षा, कौशल विकास समेत बुनियादों सुविधाओं में इजाफा किया जाएगा। इसका मकसद स्थानीय युवाओं को पर्यटकों के माध्यम से रोजगार से जोड़कर वहां से पलायन रोकना है।
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय सीमावर्ती इलाकों तक पर्यटकों को सुविधाएं बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। पर्यटकों के माध्यम से सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा में मजबूती और रोजगार बढ़ाकर स्थानीय पलायन को रोकना है। इसी के तहत बार्डर टूरिज्म प्रोग्राम में भारत के चीन, पाकिस्तान, बांग्ला देश से सटे सीमावर्ती इलाकों के लिए अलग-अलग योजनाएं तैयार की गई है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पूर्वोत्तर राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में बीआरओ कैफे बनाए जा रहे हैं।
सीमावर्ती इलाकों में घूमने आने वाले पर्यटकों को सुरक्षा लिहाज के चलते खाने-पीने की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसीलिए इन इलाकों में मूलभूत सुविधाओं में इजाफा किया जा रहा है। इन इलाकों में सड़क समेत सुविधा बढ़ाने का जिम्मा बीआरओ का होता है, इसीलिए कैफे बनाने की जिम्मेदारी भी बीआरओ को सौंपी गई है।
गांवों को गोद लेकर लोगों की मदद
केंद्रीय बजट 2022 में सीमावर्ती इलाकों में सुविधाएं बढ़ाने के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की घोषणा की गई थी। इसी के तहत राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों के गांवों को गोद लेकर बुनियादी सुविधाओं में इजाफा किया जा रहा है।
इसमें राज्य सरकारों के सहयोग से बीआरओ, बीएसएफ व सेना मदद कर रही है। यहां शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, रोजगार आदि में स्थानीय युवाओं को आगे बढ़ने में मदद की जा रही है। स्थानीय युवाओं को जोड़ने से वे रोजगार के लिए शहरों की ओर रूख नहीं करेंगे, इससे पलायन रूकेगा। पलायन होने से सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा में खतरा बढ़ रहा है।
पर्यटकों को बार्डर एरिया में खाने-पीने की सुविधाएं
बार्डर एरिया में पर्यटकों को मूलभूत सुविधाएं भी मिलेंगी। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ)के माध्यम से रक्षा मंत्रालय सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क के बुनियादी ढांचे में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सीमा सड़क संगठन कैफे बनाकर बीआरओ ने दर्शनीय स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की पहल की है। पहले चरण मेें 75 स्थानों पर बीआरओ कैफे बनाए जा रहे हैं। इसमें से पूर्वोत्तर के राज्यों में 25 स्थानों पर बीआरओ कैफे बनाए जा रहे हैं। -जी किशन रेड्डी, केंद्रीय पर्यटन मंत्री, भारत सरकार।
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