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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : Istock
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केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार दीमक से लोग दुखी हैं। भ्रष्टाचार राजनीतिक मुद्दा तो बनता है लेकिन रुकता नहीं। जनता खासकर युवा इसकी सबसे ज्यादा चपेट में हैं।
बीते 10 साल में हुई कई घोटालों ने तो युवाओं के करियर तक को खत्म कर दिया। सब इंस्पेक्टर भर्ती और जेई भर्ती उनमें से मुख्य है। प्रदेश का युवा रोजगार को लेकर परेशान है और लगातार अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। लोकसभा चुनाव के इस दौर में कई मंचों से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज तो उठ रही है लेकिन यह कितना बड़ा आंदोलन बन पाएगी यह तो भविष्य के गर्भ में हैं।
अगर अतीत में झांकें तो सरकारी खजाने को अफसरों से लेकर नेताओं तक ने खूब खाया है। सरकारी खजाने में सेंध ने ही हजारों करोड़ रुपये के घोटालों को जन्म दिया।
रोशनी स्कीम घोटाला, जम्मू-कश्मीर बैंक में 3 हजार करोड़ रुपये का घोटाला, चार लाख फर्जी गन लाइसेंस बांटने का घोटाला, पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती घोटाला, जेई सिविल, फॉरेस्ट सर्विस विभाग में भर्ती सहित कई घोटाले हुए। कुल मिलाकर जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार के मामले में बिहार के बाद शायद सबसे अधिक भ्रष्ट बन गया है।
इस बीच अब राहत की बात यह है कि सीबीआई, ईडी जैसी राष्ट्रीय जांच एजेंसियां कड़ी कार्रवाई कर रही हैं। तमाम घोटालों का पर्दाफाश सीबीआई ने किया है। यही कारण है कि बीते तीन साल में सीबीआई ने घोटालों और अन्य भ्रष्टाचार से संबंधित 40 से अधिक मामले दर्ज किए। 2019 से पहले बीते 70 वर्ष में ऐसे केवल चार मामले दर्ज नहीं हुए। आने वाले वर्षों में भी सीबीआई के सामने इससे निपटने की चुनौती बनी रहेगी।
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