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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : social media
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समय के साथ सियासी तासीर में बदलाव आम बात है। बरेली लोकसभा सीट भी इससे अछूती नहीं। यहां शुरुआत में कांग्रेस का वर्चस्व रहा था, अब भाजपा का गढ़ है। बीच-बीच में यहां से जनता पार्टी, लोक दल, जनसंघ के प्रत्याशी भी चुनाव जीतकर संसद पहुंचे, लेकिन सपा-बसपा की झोली अब तक खाली है। उनको इस सीट पर पहली जीत का इंतजार है। चुनाव आयोग की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के मुताबिक वर्ष 1962 के लोकसभा चुनाव में बरेली संसदीय क्षेत्र से जनसंघ से बृजराज सिंह सांसद बने थे।
वर्ष 1967 में यहां से एक बार फिर जनसंघ के प्रत्याशी बृज भूषण लाल ने जीत दर्ज की। वर्ष 1977 में भारतीय लोक दल के राम मूर्ति सांसद बने। वर्ष 1980 में जनता पार्टी के टिकट पर मिसर यार खान सांसद बने। बीते तीन दशक में सपा-बसपा ने भी उम्मीदवार उतारे पर जीत नसीब नहीं हुई।
वर्ष 1952 में चार भागों में बंटा था संसदीय क्षेत्र
बरेली लोकसभा सीट वर्ष 1952 में चार भागों में विभाजित थी। नैनीताल, अल्मोड़ा जिले को मिलाकर बरेली दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र से सीडी पांडे, बरेली दक्षिण से सतीश चंद्रा, पीलीभीत-बरेली पूर्व से मुकुंद लाल अग्रवाल, रामपुर-बरेली पश्चिम से अबुल कलाम आजाद विजेता बने थे। यह सभी उम्मीदवार कांग्रेस पार्टी के थे। उस दौरान कांग्रेस पार्टी का ही दबदबा था। वर्ष 1984 में भी कांग्रेस से आबिदा परवीन सांसद चुनी गई थीं।
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