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बसपा विधायक राजू पाल। फाइल फोटो
– फोटो : अमर उजाला
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राजू पाल का गांव के दबंग लड़के से शहर पश्चिमी सीट का विधायक बनने का सफर सपनों सरीखा था। गांव के छोटे-मोटे झगड़ों के लिए पहचाने जाने वाले राजू की महत्वाकांक्षा ही थी कि देखते ही देखते वह अतीक अहमद के लिए न सिर्फ चुनौती बन बैठे, बल्कि उसे वह शिकस्त दी, जिसके चलते अतीक उन्हें जानी दुश्मन मान बैठा। इस दुश्मनी की कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
राजू अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। उनके पिता बांकेलाल मूल रूप से निहालपुर करेली के रहने वाले थे और डेयरी का संचालन करते थे। उसकी मां रानी पाल एएनएम थीं और नींवा की रहने वाली थीं। नौकरी के सिलसिले में रानी मायके में ही रहती थीं और इसीलिए बचपन से ही राजू का लालन-पालन ननिहाल में ही हुआ। माता-पिता की इकलौती संतान होने के कारण और ननिहाल में मिले लाड-प्यार की वजह से ही राजू उग्र स्वभाव के हो गए और दबंगई में उनका मन लगने लगा।
गांव के युवकों के हर छोटे-बड़े झगड़ों में उनका नाम आने लगा था और धीरे-धीरे उनकी दबंगई के चर्चे गांव से निकलकर आसपास के इलाकों में भी फैलने लगे। कुछ मुकदमे भी दर्ज हुए। करीबी इन्कार करते हैं लेकिन सूत्रों की मानें तो उसकी दबंगई के चर्चे इस कदर आम हुए कि अतीक ने अपने लोगों से खुद बुलवाकर राजू से मुलाकात की थी।
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