शंकराचार्य निश्चलानंद बोले: धार्मिक क्षेत्र की रखें मर्यादा, अयोध्या-काशी व मथुरा को न बनाएं पर्यटन केंद्र

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Shankaracharya Swami Nischalanand Saraswati gave opinion on religious places

पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती
– फोटो : अमर उजाला

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पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि धार्मिक क्षेत्र की मर्यादा बनी रहनी चाहिए। अयोध्या, काशी, मथुरा, कांची, अवंतिका सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हैं। इनको पर्यटन का केंद्र बनाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। इससे काशी ना तो काशी रहेगी और ना ही अयोध्या अयोध्या रह जाएगी।

बैजनत्था स्थित बोधगया मठ में बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि आज के समय में जनता भी तपोस्थली को पर्यटन केंद्र के रूप में देखना चाहती है। कहा कि मैं उदाहरण के तौर पर बताना चाहता हूं कि मेरे बातों का प्रभाव जैन समाज पर पड़ गया। पारसनाथ पहाड़ी को सरकार ने पर्यटन केंद्र घोषित किया तो जैन समाज ने इसका विरोध किया। जैन समाज के विरोध के कारण सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। इसका अर्थ है कि जैन बुद्धिमान निकले। उन्होंने अपने तीर्थों की मर्यादा का ध्यान रखा। हिंदू समाज को भी इस पर विचार करना चाहिए।

पुरी पीठाधीश्वर ने कहा कि भारत के हिंदू राष्ट्र बनने पर ही विश्व का कल्याण होगा। भारत जल्द ही हिंदू राष्ट्र हो जाएगा और विश्व में हिंदुत्व के प्रति सम्मान बढ़ेगा। वर्तमान समय में देश की राजनीति पर शंकराचार्य ने कहा कि राजनेताओं को राजनीति की सही परिभाषा जाननी चाहिए। राजनेताओं की कमी नहीं है लेकिन वे राजनीति की परिभाषा से परिचित नहीं हैं। सुसंस्कृत, सुव्यवस्थित, सुरक्षित, समृद्ध व्यक्ति व समाज की रचना, राजनीति की परिभाषा है। राजनीति उन्माद व सत्ता लोलुपता का नाम नहीं है।

शास्त्रीय मर्यादा का नहीं करना चाहिए उल्लंघन

शंकराचार्य ने अयोध्या में राममंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान हुए विवाद पर कहा कि मैंने बोला था कि अयोध्या में रामलला प्रतिष्ठित हो रहे हैं। 500 वर्षों से जो काम रुका था वह हुआ है, अच्छी बात है, लेकिन शास्त्रीय मर्यादा का उल्लंघन भी नहीं करना चाहिए।

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