शहीद के आखिरी शब्द: भईया प्रणाम..कैसे हैं? ड्यूटी से आ गए, मैं मार्च में जाऊंगा घर; ये कहकर भर आई भाई की आंखें

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Martyr Akhilesh Rai had said these things to his elder brother, there was chaos as soon as the dead body

शहीद के आखिरी शब्द
– फोटो : संवाद

विस्तार


देश के लाल व बीएसए के जवान अखिलेश कुमार राय की शहादत के बाद हर कोई उन्हें हर कोई नमन कर रहा है। उनके बड़े भाई व बीएसएफ दिल्ली में तैनात अंजलेश कुमार राय सीधे घर आ गए। अब उनके कंधों पर जिम्मेदारियों का भार और बढ़ गया। वे कहते हैं कि तीन दिन पहले उनकी छोटे भाई (अखिलेश कुमार राय) से बात हुई थी। वह बोले थे भइया प्रणाम, कैसे हैं, ड्यूटी से आ गए कुछ खा लिए। भइया, मामा के घर भतीजी की जनवरी में शादी हैं। मैं पहुंच नहीं पा रहा हूं, मुझे अब मार्च में छुट्टी मिलेगी, तब घर आऊंगा आप शादी में चले जाइएगा। यह बातें कहते हुए उनकी आंखें भर आईं।

दो भाइयों में छोटे अखिलेश कुमार राय ने 2002 में बीएसएफ में नौकरी पाए थे। मिलनसार प्रवृत्ति के अखिलेश आखिरी बार छठ पर घर आए थे। इस दौरान रिश्तेदारों के यहां आयोजित कार्यक्रमों में भी शामिल हुए। साथ ही घर का काफी कार्य भी कराए थे। जल्द ही आने की बात कहकर आठ दिसंबर को ड्यूटी पर वापस लौटे थे। इस दौरान जो-जो अखिलेश कुमार राय से मिले थे वो बस अपने साथ हुई बातचीत को ही कहते हुए भावुक हो जा रहे थे। बड़े भाई अंजलेश राय के चेहरे पर अपने अनुज अखिलेश कुमार राय से बिछड़ने का दर्द साफ झलक रहा था। वह बार-बार यही कहते थे की पिता जी की मौत के बाद वह बड़े जरूर थे, लेकिन काफी जिम्मेदारियां अखिलेश राय ही संभाल लेते थे, अब उनके न रहने पर परिवार की सारी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर आ पड़ी है। वहीं, उनके ननिहाल असावर में भी मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। ननिहाल में भी दो दिनों से चूल्हे नहीं जले। वहीं, गाजीपुर में चंदन नगर में भी लोग शहीद अखिलेश को लेकर पूरे दिन चर्चा करते रहे। यहां भी लोग मृदुभाषी अखिलेश को लेकर चर्चाएं कर रहे थे। साथ ही देश सेवा में लगे अपने लाल को लेकर गर्व होने की बात कह रहे थे।

मैं बड़ा भाई हूं, वह मेरा बचपन से ही बहुत सम्मान करते थे। इसलिए कम बात करते थे। अभी तीन दिन पहले ही हमदोनों भाइयों की बात हुई थी। मुझे गर्व है कि मेरा भाई देश की सेवा के लिए अपने प्राण न्योेझावर कर दिया। लेकिन, परिवार को बहुत बड़ी क्षति हुई है,जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती है। -अंजलेश कुमार राय, शहीद के बड़े भाई

 

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