शिमला: चरस रखने के आरोपी की जमानत याचिका हिमाचल हाईकोर्ट ने की खारिज

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– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 1.2 किलोग्राम चरस रखने के आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने याचिकाकर्ता गगनदीप को जमानत पर रिहा करने से इनकार किया है। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक मात्रा में चरस रखने के आरोपी को जमानत दिया जाना उचित नहीं है। न्यायाधीश गोयल ने कहा कि जमानत का निपटारा करते समय अदालत का काम साक्ष्य की समीक्षा करना नहीं है। 11 मार्च 2022 को नालागढ़ पुलिस को सूचना मिली कि कुल्लू से टैक्सी में चरस की तस्करी की जा रही है। रविंद्रा-नालागढ़- स्वारघाट सड़क पर पुलिस ने टैक्सी से 1.2 किलोग्राम चरस बरामद की थी।

मामले की जांच करने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम में मामला दर्ज किया। पुलिस जांच में पाया गया था कि टैक्सी में बैठे चारो लोग अंबाला से कुल्लू गए थे। चरस खरीदने के बाद सभी लोग अंबाला जा रहे थे। अभियोजन पक्ष ने आरोपी को जमानत पर न छोड़े जाने की पैरवी की। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वह टैक्सी चालक है और सवारियों को छोड़ने अंबाला जा रहा था। वह नहीं बता सकता है कि चरस वाला बैग किस सवारी का है। उसे इस मामले में झूठा फंसाया जा रहा है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी पर लगाए गए आरोपों के कारण उसे जमानत पर रिहा किया जाना उचित नहीं है।   

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 1.2 किलोग्राम चरस रखने के आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने याचिकाकर्ता गगनदीप को जमानत पर रिहा करने से इनकार किया है। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक मात्रा में चरस रखने के आरोपी को जमानत दिया जाना उचित नहीं है। न्यायाधीश गोयल ने कहा कि जमानत का निपटारा करते समय अदालत का काम साक्ष्य की समीक्षा करना नहीं है। 11 मार्च 2022 को नालागढ़ पुलिस को सूचना मिली कि कुल्लू से टैक्सी में चरस की तस्करी की जा रही है। रविंद्रा-नालागढ़- स्वारघाट सड़क पर पुलिस ने टैक्सी से 1.2 किलोग्राम चरस बरामद की थी।

मामले की जांच करने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम में मामला दर्ज किया। पुलिस जांच में पाया गया था कि टैक्सी में बैठे चारो लोग अंबाला से कुल्लू गए थे। चरस खरीदने के बाद सभी लोग अंबाला जा रहे थे। अभियोजन पक्ष ने आरोपी को जमानत पर न छोड़े जाने की पैरवी की। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वह टैक्सी चालक है और सवारियों को छोड़ने अंबाला जा रहा था। वह नहीं बता सकता है कि चरस वाला बैग किस सवारी का है। उसे इस मामले में झूठा फंसाया जा रहा है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी पर लगाए गए आरोपों के कारण उसे जमानत पर रिहा किया जाना उचित नहीं है।   



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