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नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला
– फोटो : बासित जरगर
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नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव के लिए उनकी पार्टी तैयार है, लेकिन भाजपा और केंद्र सरकार में डरी हुई है। इसलिए चुनाव को बार-बार टाला जा रहा है। कारगिल चुनाव में जीत के बाद सोमवार को श्रीनगर में उमर अब्दुल्ला ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।
नेकां उपाध्यक्ष ने कहा कि आज उदाहरण लोगों के सामने है। कारगिल में लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद के चुनाव में जनता ने नकार दिया है। भाजपा को केवल दो सीटें मिली हैं। इसके लिए उन्होंने करगिल की जनता का शुक्रिया अदा किया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में जो हाल ही में बैठक हुई है उससे यह संकेत मिल रहे हैं कि प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव कराने का उनकी कोई योजना नहीं है। उमर ने कहा, ‘मुझे गिला भाजपा से नहीं, चुनाव आयोग से है। क्योंकि, भाजपा सियासी दल है। वो अपना फायदा-नुकसान देखेगी।’ चुनाव आयोग ने कहा कि ‘जम्मू कश्मीर में चुनाव के लिए सुरक्षा और अन्य कारणों को देखा जाएगा। लेकिन, मुझे लगता है कि केवल एक ही कारण देखा जा रहा है और वो है भाजपा का फियर फैक्टर’
उमर ने कहा कि पांच अगस्त 2019 के बाद भाजपा ने यह अफसाना फैलाना शुरू किया कि जम्मू कश्मीर से लद्दाख को अलग करने का फैसला स्थानीय लोगों की इच्छा पर निर्भर था। लेकिन, सच है यह कि जितना बुरा घाटी के लोगों को लगा, उतना बुरी ये बात कारगिल के लोगों को खटकती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा भले ये कहे कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के चलते उन्हें हार का सामना करना पड़ा लेकिन, चुनाव का नतीजे विकास के नीतियों के चलते आए हैं। उन्होंने कहा कि क्या जम्मू कश्मीर और लद्दाख का बटवारा धर्म के आधार पर हुआ है।
पदम से भी उनके प्रत्याशी ने जीत हासिल की है।
हमास और इस्राइल के बीच संघर्ष से जुड़े सवाल पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जो वहां हो रहा है वो दुर्भाग्यपूर्ण है। जहां भी हिंसा है नुकसान लोगों को होता है।
इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग की अभी तक कोई बात नहीं हुई है। उन्हें इस बात का दुख है कि अभी इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है। जिस तरह भाजपा को रोकना हमारा मकसद है उस तरह हम यहां भी करना चाहेंगे। अगर हमें लोकतांत्रिक हक नहीं मिला तो हम विरोध-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
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