संकटमोचन संगीत समारोह: जिसको जो कहना हो कहता रहे…महंत विश्वंभर नाथ बोले-  मैं कलाकार के बीच नहीं आ सकता

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Sankat mochan Sangeet Samaroh mahant Vishwambhar Nath Mishra said Whatever you want to say

संकट मोचन संगीत समारोह
– फोटो : अमर उजाला

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 संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि आज यह मंच वैश्विक स्वरूप ले चुका है। हम लोग किसी भी राज्य को छोड़ेंगे नहीं। सबको इस मंच पर लेकर आएंगे। जिसको जो कहना हो कहता रहे। हनुमानजी सर्वव्यापी हैं। हम तो पैर दबा दबाकर उनको रोके रहते हैं। लेकिन वह कहां नहीं विचरण करते रहते हैं। उनको भी सब सुनने का मन करता है।

मध्य रात्रि में आयोजन के दौरान मंच से प्रो. मिश्र ने कहा कि सब लोग आते हैं हनुमान जी महाराज को सुनाने। जिनके पास जो विद्या वो वह सुनाएगा। मैं कलाकार के बीच नहीं आ सकता। जनता जनार्दन के बीच किस रूप में हनुमान जी बैठे हों, हम नहीं जानते हैं। हम लोग ऐसी जगह पर ऐसा आयोजन कर रहे हैं जो हनुमान जी के निमित्त है। दुनिया बहुत कुछ कहती है।

कहने-सुनने में पड़ेंगे तो कुछ कर नहीं पाएंगे जीवन में। संगीत भगवत कृपा से किसी के घर में आता है और अगर आ गया है तो उसको जाने नहीं देना चाहिए। आजकल लोग छोटी-छोटी विद्या से लोगों को गुमराह करते हैं। गुमराह होने की जरूरत नहीं है। उसकी काट हनुमान जी हैं। बल-बुद्धि के दाता हैं। बल होगा तो बुद्धि नहीं देंगे, बुद्धि होगी तो बल नहीं देंगे। दोनों के समन्वय के लिए हनुमान जी की आराधना जरूरी है।

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