सर्वे में जेम्स प्रिंसेप के नक्शे का भी सहारा: किताब में बताई गई हैं आदि विश्वेश्वर मंदिर की ये खास बातें

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James Prinsep's map is also supported in the survey: these special things of Adi Vishweshwar temple are told

जेम्स प्रिंसेप द्वारा बनाया गया विश्वेश्वर मंदिर का रेखाचित्र।
– फोटो : अमर उजाला

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ज्ञानवापी के सर्वे में जुटी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम ने ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी जेम्स प्रिंसेप की तरफ से तैयार नक्शे को भी देखा। 1832 में तैयार इस नक्शे के जरिये दावा किया गया था कि आदि विश्वेश्वर मंदिर दिव्य-भव्य था। इसमें 12 कोण दर्शाए गए हैं। आठ कोण बाहरी तो चार भीतरी हैं। भीतरी कोण के पास मंडप बना है। इसके पास गर्भ गृह दर्शाया गया है।

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जेम्स प्रिंसेप ने इलेसट्रेटेड बनारस नामक पुस्तक 1832 में लिखी थी। इसमें आदि विश्वेश्वर मंदिर का नक्शा भी प्रकाशित किया था। बीएचूय के प्राचीन इतिहास विभाग के प्रोफेसर व पुरातत्वविद अशोक सिंह कहते हैं कि इसी नक्शे के आधार पर आदि विश्वेश्वर ज्ञानवापी मंदिर का नया मॉडल बनाया गया है। इसे प्रदर्शनी में रखा जा रहा है। वाराणसी के बाद लखनऊ में मंदिर का मॉडल प्रदर्शित किया जाना है। जेम्स प्रिंसेप ने जो नक्शा बनवाया था, उसमें भी आदि विश्वेश्वर मंदिर के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। कहा गया है कि 124 फीट का चौकोर मंदिर बना था। इसके चारों कोने पर मंडप है। बीच में गर्भ गृह भी है,जिसे नक्शे में मंडपम लिखकर दर्शाया गया है। नक्शे को देखकर कहा जा सकता है कि यह कुल नौ शिखर वाला विश्वेश्वर मंदिर रहा होगा।

प्रो. अशोक ने कहा कि एएसआई की टीम नक्शे की मदद से साक्ष्य जुटा सकती है। अगर कोई सच्चाई होगी तो सब कुछ सामने आ जाएगा। ज्ञानवापी के बारे में कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा। लेकिन, सोशल मीडिया पर जिस तरह से दीवालों पर चिन्ह, फोटोग्राफ, अलंकरण, कलाकृतियां देखने को मिल रही हैं, उससे यही कहा जा सकता है कि इस तरह की कला धार्मिकता को प्रमाणित करते हैं।

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