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वहीं तहसीलदार की मदद से मिली पन्नी के नीचे तेज धूप में पीड़ित परिवार के छोटे छोटे बच्चे छटपटाते नजर आए। तेजराम भी दो बच्चों को खोने के बाद पूरी तरह से टूट गया है। जहां एक ओर पत्नी माया देवी को ढांढस बंधाता है। वहीं अचानक उसके ही आंखों से आंसू बहने लगते है।
इस दृश्य को देखकर हर किसी की आंखें नम हो रही है। इसी तरह से पूरी रात सिसकियों की आवाजें गूंजती रहीं। रुक रुककर रोने की आवाज से रात का सन्नाटा रह रहकर टूटता रहा। वहीं, इस गम के माहौल में तेजराम के घर दूसरे दिन भी चूल्हा नहीं जला।
बच्चों को समझा बुझाकर कराया भोजन
गांव के पंचायत सहायक ईश्वर दयाल की ओर से पीड़ित परिवार को चाय बिस्कुट व भोजन भिजवाया। तेजराम के तीन बच्चों को समझा-बुझाकर जैसे-तैसे खाना खिला दिया गया। परंतु दो मासूमों की मौत के सदमे के चलते तेजराम व उसकी पत्नी के मुंह में रोटी का एक टुकड़ा भी नहीं जा पाया।
तेरा गंगा घाट पर दोनों शवों को दफनाया
पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार की देर शाम दोनों मासूमों का एक साथ तेरा गंगा घाट पर नम आंखों के बीच शव को दफनाया। शनिवार को भी काफी संख्या में लोग घटना पर दुख जताने उसके घर पहुंचे। हर कोई घटना से स्तब्ध और दुखी था।
नहीं पहुंच सकी थी दमकल की टीम
बता दें कि हरपालपुर थाना क्षेत्र के मखाई पुरवा गांव में झोपड़ी में आग लगने से दो मासूम बच्चों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। गांव के लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था। सूचना के बाद भी मौके पर दमकल की टीम नहीं पहुंच सकी थी, जिससे ग्रामीणों आक्रोशित हो उठे थे।
मखाई पुरवा निवासी तेजराम की पत्नी शुक्रवार की सुबह खाना बनाने के लिए चूल्हा जलाया। उसके बाद शौच करने के लिए चली गई। वहीं, परिवार के अन्य लोग खेतों पर काम करने के लिए चले गए थे। इस दौरान घर में सिर्फ तेजराम का बेटा ज्ञानेंद्र (5) और बेटी नन्हीं (3) मौजूद थे।
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